प्रणबदा सबसे परिपक्व राजनेताओं में से हैं। आडवाणी को छोड़कर उनकी किसी से तुलना नहीं होती, लेकिन कोलकाता में प्रणबदा ने जब अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हालत और टांग-खिंचाई देखी, तो उनकी भी आंखों से आंसू छलक गए। बिल्कुल आडवाणी स्टाइल में।
वोदका क्रांति
बड़ी खबर है। अपने 'भारत के वामपंथी' अब 'भारतीय वामपंथी' हो गए हैं। मतलब ये कि कम्युनिस्ट खुद को एक विश्व आंदोलन और एक वैश्विक पार्टी मानते रहे हैं और देश की सीमाओं को महत्व नहीं देते हैं। लिहाजा सीपीएम की पार्टी कांग्रेस में हमेशा दुनियाभर के प्रतिनिधियों को बुलावा भेजा जाता था। दुनियाभर- माने ये ही नेपाल, चीन, क्यूबा समेत इक्का-दुक्का और देश। लेकिन केरल और पश्चिम बंगाल में सत्ता से बेदखली के बाद से पार्टी खर्चों में कटौती की क्रांति करने पर मजबूर है। दुनिया के वामपंथी भी अब भारत के वामपंथियों को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। लिहाजा नई क्रांति ये हुई है कि मार्च में कोझिकोड में होने वाली सीपीएम की पार्टी कांग्रेस में किसी भी विदेशी प्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया है। लगता है, वोदका ज्यादा ही महंगी हो गई है।
अपशकुनी गुलदस्ता
माया महाठगिनी हम जानी...। कबीर की यह रचना नए साल पर फिर साकार हुई। टिकट मिलने के बाद बीएसपी के कई विधायक गुलदस्ते लेकर बहनजी को नए साल की बधाई देने गए। बधाई देकर लौट रहे थे कि उनमें से कुछ को वापस बुलाकर बताया गया कि भई आपका टिकट काट दिया गया है। अगले दिन तीन मंत्री गुलदस्ते लेकर बधाइयां बजाने पहुंचे। गुलदस्ते कबूल करने के बाद बहनजी ने कहा कि वह उनके स्टाफ से मिलकर जाएं। कुछ कागजों पर दस्तखत करने हैं। पता चला वे कागज उनके इस्तीफों के थे। इसके बाद से गुलदस्ते लेकर बहनजी को बधाई देने की हिम्मत किसी की नहीं हो रही है।
फंस गए भाईसाब
बहनजियों के बाद बात भाईसाहबों की। सनातन भाईसाब मतलब छोटे चौधरी यानी अजित सिंह की अजीब दिक्कत है। लोग-बाग मंत्री बनाने के लिए सिर्फ तब पूछते हैं, जब यूपी में चुनाव होने होते हैं। अब मिनिस्ट्री पॉलिटिकल किस्म की भी चाहिए और वजनदार भी। उधर चुनाव हैं, लिहाजा सरकारी मशक्कत भी कम से कम चाहिए। लेकिन भाईसाब, जब जेब में इक्के-दुक्के ही सांसद हों, तो वो कहते हैं ना- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता। भाईसाब एअर इंडिया से इस कदर उलझे हुए हैं कि पश्चिमी यूपी के जाटों को इस बार खुद ही ये अंदाजा लगाना पड़ेगा कि भई इस बार छोटे चोइसाब इस साइड हैं।
पद्म महिमा अवॉर्ड
पद्म अवार्डों की महिमा आप सभी जानते हैं। अवॉर्ड के लिए सत्ता का लाड़ला होना जरूरी होता है। और लाड़ला वही होता है, जो काम का साबित हुआ हो। इतना तो समझ में आता है। लेकिन एक बात समझ में नहीं आई। इस बार पद्मविभूषण अवॉर्ड पाने वालों में शामिल हैं डॉ. कांतिलाल हस्तीमल संचेती। उसी संचेती हॉस्पिटल के मालिक, जिसमें मुंबई का अनशन आनन-फानन में खत्म करने के बाद अन्ना हजारे भर्ती हुए थे। हैरान करने वाली बातें कई हैं- बीमार अन्ना को संचेती हॉस्पिटल ले जाने के लिए रालेगण सिद्धि से पुणे ले जाया गया था। संचेती हॉस्पिटल में अन्ना लंबे समय तक भर्ती रहे थे और उसके बाद से करीब-करीब शांत ही हैं। तो क्या संचेती हॉस्पिटल में कोई 'गुपचुप ऑपरेशन' हुआ था? पद्मविभूषण अवॉर्ड लायक? बात समझ में नहीं आई।
शर्माजी, फिर गुप्ताजी?
सीबीआई के पूर्व निदेशक पीसी शर्मा रिटायर होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मेंबर बनाए गए थे। अब वहां उनका टर्म ६ जून को पूरा हो रहा है। इधर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर बीके गुप्ता ३0 जून को रिटायर हो रहे हैं। गुप्ताजी शर्माजी वाली जगह पर नजर लगाए हुए हैं।
एयरबस में भी कॉमन वैल्थ
कॉमन वाली वैल्थ का घोटाला मामला वैसे तो अब अपनी गति को प्राप्त होने की दिशा में आ गया नजर आने लगा है, लेकिन कुछ परतें अभी भी खुल रही हैं। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक उन दिनों नागरिक उड्डयन वालों ने जो एयरबस खरीदी थी, उसमें भी कुछ वैल्थ कॉमन की गई थी और अगर जांच हुई तो वित्त मंत्रालय वाले कुछ अफसर उसकी लपेट में आ सकते हैं।
लाली, जवाहर, गैरोला!
प्रसार भारती का सीईओ पद बीएस लाली की विदाई के बाद से खाली पड़ा है। यह कुर्सी जवाहर सरकार को मिल सकती है, जो अभी संस्कृति सचिव हैं। संगीता गैरोला को अगला संस्कृति सचिव बनाया जा सकता है।
किसने दिलवाया वोट?
राम जेठमलानी राजस्थान से राज्यसभा का चुनाव कैसे जीते, इस बारे में एक रोचक कहानी सामने आ रही है। वह यह कि गुजरात हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश ने चार कांग्रेसी विधायकों और कांग्रेस सरकार में एक पूर्व मंत्री गोलमा देवी का वोट जेठमलानी को दिलवाया था।
वाघेला बनेंगे चेयरमैन
गुजरात में नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस की निगाहें घूम-फिरकर फिर शंकर सिंह वाघेला पर ही टिक रही हैं। वाघेला को आईटीडीसी का चेयरमैन बनाया जा सकता है, ताकि वो जब अहमदाबाद के सरदार पटेल एयरपोर्ट से निकला करें, तो उनका भी कुछ रौब-दाब रहे।
आईने नटवरी
बात निकलेगी, तो दूर तलक जाएगी। चीन के साथ संबंध काफी नाजुक दौर में चल रहे हैं, और १९६२ के युद्ध की बातें कांग्रेस तो कम से कम भूल ही जाना चाहती है। क्योंकि बात निकलती है तो भारत की करारी हार से लेकर नेहरू और मेनन को लपेटते हुए जाने कहां-कहां तक जाती है। और १९५० में सरदार पटेल की लिखी चिठ्ठी तो बहुत गहरा वार करती है। ऐसे में अपने कुंवर नटवर सिंह भारत-चीन संबंधों पर किताब लिख रहे हैं। किताब भी है और अपनी यादें भी हैं। नटवर उन दिनों चीन में भारतीय दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी हुआ करते थे। अब पता नहीं क्या लिख देंगे? वैसे नेहरू के लिए नटवर की निष्ठा जबरदस्त है।
शर्माजी, फिर गुप्ताजी?
सीबीआई के पूर्व निदेशक पीसी शर्मा रिटायर होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मेंबर बनाए गए थे। अब वहां उनका टर्म ६ जून को पूरा हो रहा है। इधर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर बीके गुप्ता ३0 जून को रिटायर हो रहे हैं। गुप्ताजी शर्माजी वाली जगह पर नजर लगाए हुए हैं।
एयरबस में भी कॉमन वैल्थ
कॉमन वाली वैल्थ का घोटाला मामला वैसे तो अब अपनी गति को प्राप्त होने की दिशा में आ गया नजर आने लगा है, लेकिन कुछ परतें अभी भी खुल रही हैं। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक उन दिनों नागरिक उड्डयन वालों ने जो एयरबस खरीदी थी, उसमें भी कुछ वैल्थ कॉमन की गई थी और अगर जांच हुई तो वित्त मंत्रालय वाले कुछ अफसर उसकी लपेट में आ सकते हैं।
लाली, जवाहर, गैरोला!
प्रसार भारती का सीईओ पद बीएस लाली की विदाई के बाद से खाली पड़ा है। यह कुर्सी जवाहर सरकार को मिल सकती है, जो अभी संस्कृति सचिव हैं। संगीता गैरोला को अगला संस्कृति सचिव बनाया जा सकता है।
किसने दिलवाया वोट?
राम जेठमलानी राजस्थान से राज्यसभा का चुनाव कैसे जीते, इस बारे में एक रोचक कहानी सामने आ रही है। वह यह कि गुजरात हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश ने चार कांग्रेसी विधायकों और कांग्रेस सरकार में एक पूर्व मंत्री गोलमा देवी का वोट जेठमलानी को दिलवाया था।
लो-प्रोफाइल, हाई-प्रोफाइल
राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव एसके मिश्रा बहुत लो-प्रोफाइल माने जाते हैं। लेकिन एक चीज ऐसी है, जो उन्हें किसी भी दिन सबसे ऊंची प्रोफाइल वाला बना सकती है। वह यह कि विदेशों में जमा काले धन वाले मामले के इंचार्ज मिश्राजी ही हैं।