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योजनाएं स्वाहा...

डॉ. भारत अग्रवाल | Jan 14, 2013, 10:19AM IST
योजनाएं स्वाहा...
टैमब्रेम यानी तमिल ब्राह्मणों की तारीफ आपने इस कॉलम में पहले भी देखी है। इस बार हम आपको बात बता रहे हैं कांग्रेस के टैमब्रेम यानी वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की। सच यह है कि सरकारी, राजनीतिक और मीडिया कर्मकांडों में भी तमिल ब्राह्मणों का कोई जवाब नहीं है। धार्मिक अनुष्ठानों के अंत में "क्षमा प्रार्थना" की जाती है और माना जाता है कि इससे अनुष्ठान में हुई किसी गलती का दोष नहीं रह जाता है। इसी तरह चिदंबरम ने डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम का ऐलान करने के बाद पूरे इत्मीनान से "इदम् न मम" की घोषणा मीडिया के सामने कर दी। भई बड़ी योजना है, कुछ तो दिक्कत आएगी, कुछ तो समय लगेगा, नतीजे अभी नहीं मिलेंगे। बात खत्म। न योजना पर सवाल किया जाए, न समय पर और न नतीजों पर। है ना शानदार और डायरेक्ट स्कीम?
 
 
छवि सुधारो छवि
खबर ये है कि कांग्रेस की युवराज के नेतृत्व वाली टीम लोकसभा चुनाव की तैयारियां काफी तेज कर चुकी है। विरोधी पार्टियों की बारीकियों पर बारीकी से दिए जा रहे ध्यान और बाकी बातों के अलावा मीडिया पर, या ज्यादा सही तौर पर छवि सुधारने पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। हिमाचल में मिली जीत से कांग्रेस को भरोसा हो गया है कि केंद्र के मसलों से राज्यों की पॉलिटिकल सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है। पिछले साल की मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुकाबले इस साल कांग्रेस अपनी पॉलिटिकल सेहत भी बेहतर ही मान रही है। जयपुर में चिंतन बैठक भी होने जा रही है। क्षेत्रीय प्रकाशनों और मीडिया घरानों की पीआर एजेंसियों के जरिए केंद्रीय मंत्रियों से सीधे रूबरू करवाया जा रहा है। मीडिया पर बना मंत्रियों का समूह भी धड़ाधड़ दौरे कर रहा है। टारगेट सीधा-सा यह है कि कांग्रेस की छवि चुनाव जीतने लायक रहे।
 
डेंट है कि छूटता नहीं 
लेकिन अभी तक एक मसला कांग्रेस के छवि सुधारो अभियान में शामिल नहीं हुआ है। दिल्ली गैंगरेप के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में शामिल युवतियों के लिए राष्ट्रपति पुत्र अभिजीत मुखर्जी की "डेंटेड-पेंटेड" वाली टिप्पणी की खासी आलोचना हुई थी और इस आलोचना के बाद परिवार के लोगों सहित भारी दबाव में उन्हें बयान वापस भी लेना पड़ गया था। लेकिन मुसीबतें इससे खत्म नहीं हुई हैं। अभिजीत मुखर्जी के साथ ही विमान में सफर करने वाले एक चश्मदीद ने ट्वीट किया है कि लोगों ने उन्हें देखते ही "डेंटेड-पेंटेड" कहना शुरू कर दिया। जाहिर है, अभिजीत मुखर्जी को इससे काफी परेशानी भी हुई।
 
 
असली फास्ट ट्रैक
वैसे रेप मामला कांग्रेस के छवि सुधारो अभियान में पूरी गंभीरता से शामिल है। मामला फास्ट ट्रैक अदालत में है। जस्टिस वर्मा कमेटी कानूनी सुधार का पहलू देख रही है और कांग्रेस आलाकमान अगले ही सत्र में कड़ी सजा वाला कानून बनवाने के पक्ष में है। लेकिन उधर असम में कांग्रेस के एक विधायक पर बलात्कार का आरोप लगा है। मामला तो दर्ज हुआ ही, भीड़ ने उनकी खुल्लमखुल्ला धुनाई भी कर दी। कांग्रेस के एक नेताजी का मजाक में कहना था कि यह धुनाई ही असली फास्ट ट्रैक फैसला है।
 
रस्क और बिस्किट
भाजपा के एक बड़े नेता हैं, जो इस कड़ाके की सर्दी में भी सुबह की नियमित सैर करने से नहीं चूकते। एक और बड़े नेता ने उनसे पूछा कि वह जहां टहलते हैं, क्या वहां चाय मिल जाती है। उन्होंने कहा, हां मिल जाती है। और चाय के साथ बिस्किट? इस पर नेताजी ने मजाक में कहा कि हम "भारत" वाले हैं। हम आमतौर पर रस्क खाते
हैं। बिस्किट तो "इंडिया" वाले खाते हैं। लगता है मोहन भागवत की टिप्पणी का संघ और भाजपा ने जमकर बचाव यूं ही नहीं किया था।
 
 
आकाशवाणी!
आमतौर पर पायलट उड़ान के दौरान माइक पर यात्रियों को बताते हैं कि इस समय ऊंचाई कितनी है, किस शहर के ऊपर से उड़ रहे हैं, बाहर का तापमान कितना है, कितनी देर और लगनी है वगैरह। लेकिन हाल के दिनों में जब एक निजी विमान अहमदाबाद पहुंचने वाला था, तो हवाई अड्डा आने के पहले सह-पायलट ने माइक्रोफोन पर यात्रियों से कहा कि आज का दिन अहमदाबाद और गुजरात के लिए गर्व का दिन है क्योंकि नरेंद्र मोदी आज फिर शपथ लेने जा रहे हैं। जानते हैं यह सह-पायलट कौन थे ? भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी, जो कभी इसी महकमे के मंत्री भी रह चुके हैं।
 
जनहित में वापसी!
काफी हुज्जत के बाद राम जेठमलानी भाजपा से निलंबित हुए थे, लेकिन अब उनकी वापसी अनायास होने जा रही है। कानाफूसी यह है कि हो सकता है इस वापसी का संबंध बॉम्बे हाइकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका से हो। यह जनहित याचिका शिरोडकर ने पूर्ति समूह के खिलाफ दायर की है। 
 
राय इफेक्ट
सीएजी विनोद राय के खिलाफ कई लोगों ने अपने उच्च विचार व्यक्त जरूर किए थे, लेकिन वास्तव में उन्हें तारीफें ज्यादा मिली हैं। बहरहाल, उनकी आलोचना का असर यह है कि संसद में वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति में विचार हो रहा है कि आइंदा से सीएजी का चयन प्रधानमंत्री, विपक्ष के दोनों नेता, पीएसी के अध्यक्ष और
प्रधान न्यायाधीश मिलकर किया करें। लेफ्ट इसका समर्थन कर रहा है।
 
हो सकता है बड़ा खेल हो
लेफ्ट के समर्थन से याद आया, यह बताइए क्या आपको गुड़गांव में कुछ महीने पहले एक बड़ी इंडस्ट्री में हुई हिंसा-आगजनी याद है? उसमें नक्सलियों के शामिल होने की पक्की खबर खुफिया वालों के पास है। और अब खुफिया वाले कह रहे हैं कि दिल्ली के जंतर-मंतर या विजय चौक पर जो बार-बार तहरीर चौक बन रहा है, उसके पीछे जेएनयू और लेफ्ट वाले हैं।
 
नंबरों का दरिया है...
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