भ्रष्टाचार पर गुस्सा जायज : राष्ट्रपति
भ्रष्टाचार पर लोगों का गुस्सा जायज है। लेकिन इसकी आड़ में लोकतांत्रिक संस्थाएं ध्वस्त नहीं की जा सकती। बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में ये बातें कहीं। टीम अन्ना व रामदेव के आंदोलन के संदर्भ में यह बात कही गई है।
प्रणब ने कहा कि भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गरीबी, भूख और बीमारी की समस्याओं से सबसे पहले निपटने की जरूरत है। तेज विकास के लिए युवाओं को आगे बढ़ाने और उनकी जरूरतों को पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगने से विकास की रफ्तार कम हो रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं संविधान की स्तंभ हैं। अगर उनमें दरार पड़ी तो संविधान की मूल भावनाओं की रक्षा नहीं की जा सकेगी। इनमें खामियां हो सकती हैं, लेकिन इन्हें ध्वस्त करके कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, लोगों को यह समझना होगा कि विधायिका से कानून बनाने और न्यायपालिका से न्याय देने का हक छीना नहीं जा सकता। विरोध हद पार कर जाए तो अराजकता हो जाती है। राष्ट्रपति ने असम हिंसा पर चिंता जताई। कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा किए समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है। अल्पसंख्यकों को भी साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) के सदस्य देशों को आतंकवाद से मिलकर लडऩा होगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की दरकार है।







