रिटेल में एफडीआई: 5 फायदे और 5 नुकसान
नई दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस ने किराना (रिटेल) क्षेत्र में 51 फीसदी एफडीआई की मंजूरी देने, डीजल (जिसकी कीमत अभी और बढ़ सकती है) पांच रुपये प्रति लीटर महंगा करने और लोगों को साल में सिर्फ 6 रियायती सिलेंडरदेने की समय सीमा तय करने के विरोध में अब प्रधानमंत्री से इस्तीफा (पढि़ए, यूपीए के पास क्या हैं विकल्प) मांगा है। ज्यादातर राज्य सरकारें, खास कर गैर कांग्रेस शासित राज्य, भी रिटेल में एफडीआई के विरोध में हैं (पढि़ए : राज्यों का रुख)।
इस मसले पर पार्टियों और सरकारों का रुख राजनीतिक नफा-नुकसान के आधार पर ही सामने आया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के सुप्रीमो राज ठाकरे ने कहा है कि वे रिटेल में एफडीआई के समर्थक हैं, लेकिन रिटेल में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों को न सिर्फ मराठी युवाओं को नौकरी देनी होगी बल्कि फायदे का बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के विकास में लगाना होगा। शिवसेना की तरह वह भी 20 सितंबर के एनडीए के भारत बंद में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
पार्टियों के रुख से इतर, असल में खुदरा बाज़ार में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की इजाजत देने के सरकार के फैसले से देश को क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं? हम आपको इस सवाल का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। आगे स्लाइड पर नज़र डालिए:
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