कांग्रेस के युवराज अपने 'मिशन उत्तर प्रदेश' में इस कदर रम गए हैं कि उन्हें न संसद सत्र की सुध रह गई है और न किसी और चीज की। मायावती इस बात पर कटाक्ष भी कर चुकी हैं। लेकिन असली दिक्कत हो रही है युवराज के संगी-साथियों को। दरअसल क्रिसमस करीब है और साथी लोगों को 'परिवार' के साथ क्रिसमस मनाने का इंतजार है। सब युवराज की तरफ देख रहे हैं और युवराज यूपी में ही डटे हुए हैं। न क्रिसमस स्थगित हो सकती है और न ही चुनाव।
बांग्ला खेल
वोट मुखर्जी का, वीटो बनर्जी का। पश्चिम बंगाल के इन दो महारथियों- प्रणब मुखर्जी और ममता बनर्जी- के बीच चले फुटबॉल मैच को बाकी देश में 'एफडीआई वाला फसाद कहते हैं। रिटेल में एफडीआई का आइडिया प्रणब मुखर्जी का था और यह अंतत: सिरे नहीं चढ़ सका, तो ममता बनर्जी के वीटो के कारण। जब आइडिया ठप्प होने का ऐलान हो गया, तो विपक्षियों और विपक्षी टाइप समाजवादियों वगैरह ने ममता तक उनकी बधाई पहुंचाने के लिए तृणमूल के सुदीप बंधोपाध्याय से कहा। सुदीप बोले- सारा श्रेय जाता है मुखर्जी और बनर्जी को।
कोई (सहारा) न रहा..
चर्चा यह है कि मनमोहन सिंह परमाणु करार की तरह एफडीआई झंझट पर भी आर-पार करने के मूड में थे। लेकिन दिक्कत यह थी कि इस बार कांग्रेस की मदद के लिए कोई अमर सिंह उपलब्ध नहीं था। परमाणु करार पर अमर सिंह के 'हाथ' ने ही सरकार बचाई थी (और मामला अभी चल ही रहा है)। अब अमर सिंह पस्त हैं। कांग्रेस एक बार उन्हें 'यूज' कर चुकी है और (बार-बार यूज के बाद) मुलायम उन्हें 'थ्रो' कर चुके हैं। देखिए,संसद सत्र के फौरन बाद एफडीआई पर फिर कुछ गुल खिल सकते हैं। एक अहम मीटिंग होनी है।
और भारत माता गायब
अन्ना हजारे के इस बार के अनशन की तस्वीरें क्या आपने टीवी पर गौर से देखीं? हम बताते हैं। पिछली बार जब अन्ना अनशन पर बैठे थे, तो उनके पीछे 'भारत माता' की तस्वीर वाला पोस्टर था और इसी से दिग्विजय सिंह को यह कहने का मौका मिल गया था कि अन्ना का आंदोलन आरएसएस द्वारा प्रायोजित है। लेकिन इस बार अन्ना ने न केवल सारी पार्टियों को न्यौता भेजा,बल्कि 'भारत माता' वाले पोस्टर की जगह सिर्फ तिरंगा लगाया।
असली ब्रेकिंग न्यूज
अगर आर्कमिडीज देसी टीवी चैनल देखते हुए बड़े हुए होते, तो यूरेका की जगह 'ब्रेकिंग न्यूज' चिल्लाते। यकीन न हो तो कीर्ति आजाद से पूछ लीजिए। लोकपाल के दायरे से ग्रुप-सी के कर्मचारियों को बाहर रखने का विरोध संसदीय समिति में जब राहुल गांधी की नजदीकी मीनाक्षी नटराजन समेत तीन कांग्रेसियों ने भी कर दिया,तो कीर्ति आजाद 'ब्रेकिंग न्यूज'चिल्लाते हुए बाहर निकले। वैसे क्रिकेटरों को 'हाउज दैट' चिल्लाने का ज्यादा अभ्यास होता है, लेकिन कीर्ति को ये आदत तब भी नहीं पड़ सकी थी, जब वे सचमुच क्रिकेट खेलते थे।
जो पीटे, सो भाजपा का
दो जाने-माने सरदार भाजपा के सांसद हैं। एक हैं नवजोत सिंह सिद्धू, जिन्होंने हाल ही में नैल्लोर जिले में एक टोल गेट पर अपनी कार के शीशे पर डंडा मारने वाले गार्ड की बाकायदा हाथ-पैरों से खबर ले डाली थी। दूसरे हैं एसएस आहलुवालिया, जो पिछले हफ्ते कांग्रेस के राशिद अल्वी से भिड़ते-भिड़ते ही बचे थे। इस पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने मजाक में कहा- Rहमारे सरदार सबको पीटते फिरते हैं और कांग्रेस का सरदार पिटता रहता है।
मौखिक पिटाई
और भाजपा के सरदार बयानों से भी पीटना जानते हैं। बानगी देखिए- एक निजी विमान कंपनी के एक वरिष्ठ पायलट (जो सिख था) की इटली के मिलान एयरपोर्ट पर पगड़ी उतारकर तलाशी ली गई। मार्च में ऐसा ही हाल जीव मिल्खा सिंह के कोच अमृतिंदर सिंह का इसी एयरपोर्ट पर हुआ था। एसएस आहलुवालिया इस विषय पर प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे, और बाकी बातों के अलावा उन्होंने यह भी कह डाला कि सरदारों का (यानी प्रधानमंत्री का) ऐसा अपमान इटली में ही क्यों होता रहता है? समझ गए न आप!
बड़ों की बातें
लोकसभा सचिवालय में एक मामले को दबाने की कसरत चल रही है। मामला है एक चित्र-पुस्तक का। यह पुस्तक चार साल की कड़ी मेहनत के बाद बाहर आई है और इसमें इतनी गलतियां हैं कि गिनने में ही आठ-दस साल लग जाएं। जैसे आज तक कोई नहीं जानता कि नेताजी की मृत्यु कब हुई थी, लेकिन इस किताब में बाकायदा तारीख तक दी हुई है। शिकायतें भी हुई हैं, लेकिन मामला एक अफसरशाह के परिवार का है।
ऐसे कैसे चलेगा
वैसे भी संसद सत्र अपना अर्थ तेजी से खोते जा रहे हैं। और तो और, विपक्ष को जी-भरकर वॉकआउट करने तक का मौका नहीं मिल पा रहा है। महंगाई पर प्रणब मुखर्जी के जवाब को रटा-रटाया बताकर भाजपा ने वॉकआउट करना चाहा, चंद कदम चले भी, फिर लौट आए। दरअसल उन्हें एफआईआर के बावजूद एसएम कृष्णा को मंत्री बनाए रखने के खिलाफ भी वॉकआउट करना था। और दो-दो बार वॉकआउट लायक गुंजाइश नहीं थी। कैसे चलेगा लोकतंत्र?
कुछ हो रहा है
संसद में बहस भले ही न चल पाती हो, मेल-मिलाप बढ़िया हो रहा है। अंदर की बात यह है कि कॉमरेडों और भाजपा में कुछ-कुछ वैसा ही तालमेल नजर आ रहा है, जैसा वीपी सिंह के जमाने में था। लाल सलाम वाली ट्रेड यूनियनें संघ के भारतीय मजदूर संघ के साथ मिलकर आंदोलन की योजना बना रही हैं। हो सकता है कॉमरेड वंदेमातरम कहते नजर आएं, और भाजपा वाले भी लाल सलाम ठोक दें।