राहुल गांधी की फूलपुर सभा में कई फूल खिले- दो मंत्रियों पर मामला दर्ज हुआ,महाराष्ट्र में भीख मांगने वाली बात पर काफी छीछालेदर हुई। वह सब तो ठीक है,लेकिन कांग्रेस के युवराज पर नजरें गड़ाए लोगों को इसमें एक बात और नजर आई। वह यह कि कांग्रेस के युवराज भाषण देने में पारंगत होते जा रहे हैं। बिना पढ़े और लेवल भी हाई।
फिल्मों के शौकीन नेता शौकीन नेता
लालकृष्ण आडवाणी को फिल्में देखना पसंद है,यह सभी जानते हैं। लेकिन इसी श्रेणी में नरेंद्र मोदी और अनंत कुमार भी आते हैं, यह बात आडवाणी को हाल ही में पता लगी। गुजरात में जनचेतना यात्रा के दौरान एक सभा में मोदी कमल हासन की एक फिल्म का उदाहरण दे रहे थे,लेकिन फिल्म का नाम भूल रहे थे। मंच पर बैठे अनंत कुमार ने तुरंत याद दिला दिया- ‘पुष्पक’। आडवाणी ताड़ गए कि ये दोनों भी फिल्मों के शौकीन हैं। पहले आडवाणी समझते थे कि फिल्मों के शौकीन राजनेता वह अकेले ही हैं।
नरमदिल लौहपुरुष
इधर आडवाणी पर नजरें रख रहे लोगों को एक अलग ही बात दिख रही है। लौहपुरुष ज्यादा ही भावुक हो रहे हैं। वाराणसी की सभा में उमा भारती के भाषण के दौरान आडवाणी के आंसू छलक गए। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह जब बेटी का महत्व समझा रहे थे, तो आडवाणी का गला रुंध गया था। लोकसभा में लोकपाल बिल मसले पर सुषमा स्वराज के भाषण पर आडवाणी ने न केवल आंसू पोंछे,बल्कि सुषमा को आशीर्वाद भी दिया। दिल्ली में जन्मदिन समारोह में जब राजनाथ सिंह ने आडवाणी की तारीफ की तो आडवाणी भावुक हो गए। नजदीकी लोग कहते हैं कि लौहपुरुष अंदर से बहुत नरमदिल हैं।
गिफ्ट लौटाने का इंतजार?
किंगफिशर का समय फिलहाल भले ही खराब चल रहा हो, लेकिन इस कंपनी के बनाए कैलेंडर का सबको इंतजार रहता है। विजय माल्या ये कैलेंडर (और साथ में एक बोतल) तमाम सांसदों को गिफ्ट करते हैं। इसका इंतजार उनको भी रहता है, जो लोकलाज में दोनों गिफ्ट लौटा देते हैं। इस बार इधर किंगफिशर का कैलेंडर सीजन है, उधर किंगफिशर एयरलाइंस का खराब सीजन है। और कुछ सांसदों ने एडवांस में कहना शुरू कर दिया है कि माल्या कैलेंडर में पैसे फूंकने के बजाय एयरलाइंस ठीक से क्यों नही चलाते। इसे क्या कहें? गिफ्ट मिलने, देखने और लौटाने के मौके का इंतजार?
अमर रहे ‘नौटंकी’
‘नौटंकी’ यूपी की पुरानी लोककला है और यह गंभीर खतरे से गुजर रही है। खतरा ये है कि जल्द ही इसका नाम बदलकर ‘अमरकला’ हो सकता है। हम बात कर रहे हैं अपने अमर सिंह की। सांसद घूस कांड का एपिसोड। जेल (और एम्स) जाने और फिर खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मिलने का एपिसोड। जमानत के बाद जयाप्रदा के साथ वाराणसी में जनसभा करने और जनसभा में दाढ़ी बढ़ाकर मुलायम सिंह को खरी-खोटी सुनाने का एपिसोड। किसी ने दाढ़ी का रहस्य पूछा तो अमरवाणी हुई- ‘ये दाढ़ी नहीं..मेरे दिल का दर्द है..(समझे जॉनी)’। नौटंकी के संरक्षण के लिए अब संयुक्त राष्ट्र को कुछ करना चाहिए।
फुलटाइम बनाम खाली टाइम
ऐसा नहीं है कि ज्यादातर नेताओं की जिंदगी फिल्म, गिफ्ट और ‘नौटंकी’ में गुजर जाती है। कई पेशे से वकील हैं, गुजारा वकालत से करते हैं और खाली टाइम में नेतागीरी कर लिया करते हैं। ज्यादातर प्रवक्ता वकील हैं और अदालत से फ्री होकर ही प्रेस से मिलते हैं। कई संसदीय समितियों की बैठक भी इसीलिए शाम को सात बजे रखी जाती है। इस बार विधि और न्याय मंत्रालय की संसदीय समिति में कुछ फुलटाइम नेताओं ने आपत्ति ठोक दी। कहा कि संसदवा का मीटिंगवा भी पांचे बजे खत्म हो जाता है, तो ससुर ई मीटिंग सात बजे कइसे हो सकता है? नेतागीरी करनी है, तो फुलटाइम करो। अध्यक्ष भी वकील साब हैं। पर अब क्या करें?
चुनाव तैयारी शुरू
एक राज्यसभा सदस्य की सरकारी कोठी में कांग्रेस का ‘वार रूम’ है। प्रमोद महाजन स्टाइल का। पांच राज्यों में चुनाव आ गए हैं, तो यहां इन दिनों फिर गहमागहमी है। अमूमन चुनावी ‘वार रूमों’ की हालत पितृ पक्ष के कौवे-कुत्ते की तरह होती है। सीजन है तो सबकुछ है, वरना कौवा-कुत्ता है। लेकिन इस बार का कांग्रेस का वार रूम इन पांच विधानसभाओं के बाद लोकसभा चुनाव तक जवान बनाए रखना तय हुआ है। लंबा सीजन। मतलब समझ गए न आप?
सिब्बल का मौन व्रत
टूजी घोटाले की रकम को लेकर हुए झगड़े से आपको हैरानी नहीं हुई? दरअसल इसमें हैरानी की असली बात यह है कि अपने कपिल सिब्बल अभी तक बीच में नहीं कूदे हैं। और तो और, इतने सारे झंझट चल रहे हैं, किसी में नहीं कूदे हैं। ईश्वर जाने कैसे कंट्रोल किया होगा। लेकिन सच ये है कि कपिल सिब्बल सचमुच सिर्फ मंत्रालय के काम में बिजी हैं। बची सरकार और पार्टी, तो हमने बताया ही था वहां बहुत झंझट पहले ही मौजूद हैं।
तेल देखो, धार देखो
वियतनाम की खाड़ी में पेट्रोलियम की खोज को लेकर चीन के साथ भारत की तनातनी चल रही है। ‘खाड़ी’ और ‘पेट्रोलियम’ के इस माहौल में चीन पर कुंवर नटवर सिंह की एक पुस्तक बहुत जल्द प्रकाशित होने जा रही है। मजा आएगा। पढ़ने में भी, सुनने में भी।
दिन फिरे स्वामी के
शनि का राशि बदलना सुब्रमण्यम स्वामी को खूब फल रहा है। इधर कोर्ट से दस्तावेज मिल गए हैं, उधर राम जेठमलानी के साथ समझौता हो गया है। समझौता संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने करवाया है। खूब जमेगा रंग।
मार्च तक इंतजार
रंग एक और है। पॉवर सेक्टर के ऋण और अल्ट्रा मेगा एस्टेट्स- ये दोनों सीएजी के निशाने पर हैं। रिपोर्ट आने पर जमकर होली होगी।
कोर्ट में असंतुलन
सुप्रीम कोर्ट में असंतुलन अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की 11 जजों की पीठ ने सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व देने का फैसला एकमत से किया था। लेकिन सात राज्यों वाली गुवाहाटी हाईकोर्ट का जरा भी प्रतिनिधित्व नहीं है। यही हाल हिमाचल और सिक्किम का है, जबकि दिल्ली के तीन और केरल के दो जज हैं।