नई दिल्ली। हिंदुस्तान में भले ही बलात्कार के खिलाफ कड़े कानून की मांग की जा रही हो लेकिन देश में कई ऐसे इलाके भी हैं जहां बलात्कारी एक बकरी या कुछ मुर्गें देकर बच सकते हैं। झारखंड में 'हो' जनजाति में यह प्रचलन आम है। यदि पंचायत के सामने बलात्कार का कोई केस आता है तो अधिकांश मामले में बलात्कारी को सजा के तौर पर पीड़ित लड़की के परिवार को एक बकरी या कुछ मुर्गें देने पड़ते हैं।
एक अंग्रेजी अखबार की खबर में कहा गया है कि ऐसे विवादों को निपटाने के लिए यहां मंकी-मुंडा सिस्टम काम करता है। गांव के मुखिया को मुंडा कहते हैं। जबकि गांवों के एक समूहों के मुखियों को मंकी कहते हैं। बलात्कार के आरोपियों की किस्मत का फैसला यही करते हैं। मुंडा और मंकी के फैसले के खिलाफ बहुत कम लोग पुलिस के दर पर जाते हैं।
अखबार के अनुसार, रांची से 150 किलोमीटर दूर तांतनगर के मझगांव विधानसभा क्षेत्र में एक लड़के ने एक लड़की के साथ रेप किया। मामला पंचायत के पास गया तो आरोपी को 500 रुपये जुर्माना और 5 मुर्गों की सजा देकर छोड़ दिया गया।