500 का नोट लेने से पहले इस खबर को जरूर पढ़िए
Source: अरुण श्रीवास्तव. | Last Updated 13:58(22/01/12)
नई दिल्ली। बाजार में फर्जी नोट चलाने वाले गिरोहों की पहली पसंद 500 रुपए के नोट बन गए हैं। बैंकों को लेन-देन के दौरान मिलने वाले जाली नोटों में सबसे ज्यादा संख्या 500 रुपए के हैं।
सूत्रों ने बताया कि वित्त खुफिया इकाई (एफआईयू) को बैंकों से मिली संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट में पता चला है कि बैंकों द्वारा पकड़े गए जाली नोटों में लगभग 60.74 प्रतिशत करेंसी नोट 500 सौ रुपए के थे।
2010-11 के दौरान 1000 के जाली नोटों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च 2011 तक एफआईयू को जाली नोट से जुड़ी अनेक घटनाओं की जानकारी मिली। इनमें फर्जी नोटों की बैंक या वित्तीय संस्थानों ने पहचान कर ली थी।
सूत्र बताते हैं कि हालांकि इन घटनाओं में प्रयुक्त नोटों का मूल्य केवल 35 करोड़ ही था परंतु यह संख्या दर्शाती है कि इन नोटों को अर्थव्यवस्था में ढकेलने वाले गिरोह आम जनता के बीच कितनी बड़ी संख्या में नोटों को चला रहे होंगे।
सूत्रों ने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था में गड़बड़ी फैलाने के लिए सक्रिय गिरोहों ने अपने प्रयास बहुत तेज कर दिए हैं। इसका प्रमाण है कि पिछले वित्त वर्ष में बैंकों के जरिए फर्जी नोटों के लेन-देन की संख्या में 2009-10 के मुकाबले 200 प्रतिशत इजाफा हो गया है।
नया फार्मेट
सूत्रों ने बताया कि फर्जी नोटों के बढ़ते प्रसार को देखते हुए एफआईयू ने बैंकों व दूसरे वित्तीय संस्थानों के लिए 'नकली मुद्रा लेन-देन' की रिपोर्टिंग एफआईयू को करने के लिए एक नया फार्मेट जारी किया है।
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत बैंकों को सभी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी एफआईयू को देनी जरूरी होती है। इसमें फर्जी करेंसी नोटों के जरिए किए गए लेन-देन की जानकारी भी शामिल है।
सरकारी बैंक पीछे
पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान फर्जी नोटों को पकडऩे की रिपोर्ट देने में निजी क्षेत्र बहुत आगे रहा है। सरकारी बैंकों द्वारा एफआईयू को कम रिपोर्ट भेजी गई। सरकारी बैंकों से रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए एफआईयू विशेष ध्यान दे रहा है।