जालंधर. विदेशी किराना कंपनियों के रिटेल में आने से किसान को उपज का ऊंचा दाम मिलने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। और यह वही कंपनी कर रही है जिसको लेकर संसद में चार दिनों तक बहस चलती रही - वॉलमार्ट। भारती के साथ साझेदारी में इस कंपनी ने पंजाब के बहुत से किसानों से बेबीकॉर्न लगाने का करार किया। पूरी उपज वॉलमार्ट को आठ रुपए किलो के भाव पर खरीदनी थी। लेकिन खर्च निकाल कर किसानों को मिला केवल 3 रुपया प्रति किलो जबकि उनकी उपज को उन्हीं के शहर में वॉलमार्ट 100 रुपए किलो के दाम पर बेच रही है। नाराज किसान अगले साल अपनी उपज कोऑपरेटिव बनाकर ब्रिटेन की कुछ कंपनियों को बेचने की योजना बना रहे हैं। (वोट नहीं डालने वालों पर होगी कार्रवाई? केजरीवाल चाहते हैं जनमत संग्रह)
पंजाब में आलू की खेती में क्रांति लाने वाले पोटेटो किंग जसविंदर सिंह सांघा ने 25 एकड़ में बेबीकॉर्न लगाया। लेकिन इतना नुकसान हुआ कि आगे यह फसल उगाने से तौबा कर रहे हैं। सांघा कहते हैं कि जिस कीमत पर करार है उसी पर बेचना लाजिमी है लेकिन हर किलो पर 92 रुपए का मुनाफा ठीक नहीं है। लेकिन वॉलमार्ट के सीईओ राज जैन इससे इंकार करते हैं। वे कहते हैं कि वॉलमार्ट ने उससे जुड़े किसानों के विकास की अच्छी प्लानिंग की है। अगर किसी किसान को कोई शिकायत है तो वॉलमार्ट उसका समाधान करेगा। (पौने 11 करोड़ लोगों से धोखा! एफडीआई पर वोटिंग से नदारद रहे आपके नुमाइंदे)