नई दिल्ली. एक पूर्व नौकरशाह की किताब ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (
गुजरात में हैट्रिक के बाद क्या मोदी बनाम राहुल की होगी लड़ाई?) को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। 1965 बैच के आईएएस अधिकारी जाविद चौधरी की किताब 'द इनसाइडर्स व्यू-मेम्वॉयर्स ऑफ अ पब्लिक सर्वेंट' में दावा किया है कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार ने केंद्र की तरफ से मेडिकल मदद लेने से इनकार कर दिया था और बार-बार यह बताया था कि राज्य में हालात सामान्य हैं, जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को गुजरात के हालात की पूरी खबर थी। चौधरी 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में सचिव के पद पर तैनात थे। (
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किताब के 'डिस्चार्ज ऑफ राजधर्म? 2002' शीर्षक से प्रकाशित 18 वें चैप्टर में चौधरी ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री के आदेश के बावजूद मोदी (
इन पांच कारणों से लगातार जीत पाए मोदी)ने तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को शाह आलम रिलीफ कैंप में जाने की अनुमति नहीं दी थी और न ही वे खुद वहां गए थे। चौधरी ने यह दावा भी किया है कि गुजरात के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अशोक भट्ट ने यह धमकी भी दी थी कि अगर केंद्रीय मंत्री शाह आलम रिलीफ कैंप में जाने की जिद करेंगे तो वह चलती हुई कार से कूद जाएंगे। (
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