नई दिल्ली. भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाने के लिए संघ ने भले ही राह आसान कर दी है, लेकिन इस बारे में अंतिम फैसला अभी नहीं हो सका है। ताजपोशी की राह में कुछ कठिन अवरोध अब भी मौजूद हैं जिन्हें दूर करने के लिए संघ प्रयासरत है। गडकरी को दूसरी पारी देने के लिए पार्टी के ज्यादातर नेताओं ने हालांकि ना-नुकुर बंद कर दी है, लेकिन राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली, यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
संघ के हस्तक्षेप के बाद लालकृष्ण आडवाणी नरम तो पड़े हैं, लेकिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आए हैं। संघ के नंबर दो भैयाजी जोशी ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से गडकरी के नाम पर चर्चा कर समर्थन जुटाने में सफलता पाई है लेकिन हकीकत यह है कि वे नेताओं को मन से राजी नहीं कर सके हैं। गडकरी पर अंतिम रूप से फैसला लेने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक और बैठक, चार और राज्यों के संगठनात्मक चुनाव होने के बाद होगी। इस बैठक में गडकरी को दूसरा टर्म देने के नफा और नुकसान तथा समर्थक और विरोधियों के तर्क पर चर्चा होगी।
राह में प्रमुख अड़चन
फिलहाल गडकरी की राह में जो सबसे बड़ी दिक्कत आ रही है वह है-आयकर विभाग की तरफ से जारी होने वाले नोटिस। भाजपा नेता चाह रहे हैं कि दोबारा अध्यक्ष बनने के बाद गडकरी के सामने आयकर विभाग या अन्य जांच एजेंसियां खड़ी न रहें। यदि ऐसा होता है तो पार्टी को नुकसान होगा। हालांकि भाजपा की तरफ से इस बात का खंडन किया गया है कि गडकरी को आयकर विभाग का कोई नोटिस मिला है, लेकिन यह तय है कि नोटिस का 'भूत' आज या कल गडकरी के सामने आएगा जरूर।