नई दिल्ली। भगवा आतंकवाद पर शिंदे और भाजपा का मामला सुलटते ही आरएसएस और भाजपा के मतभेद सामने आ गए हैं। संघ, शिंदे के खेद को नाकाफी मानते हुए माफी चाह रहा है जबकि भाजपा शिंदे की ओर से बिना शर्त खेद प्रकट करने को पर्याप्त बता रही है।
गौरतलब है कि भगवा आतंकवाद को लेकर दिए अपने बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बुधवार को खेद व्यक्त किया, जिसका भाजपा ने स्वागत करते हुए शिंदे के बहिष्कार का फैसला वापस ले लिया। मामला थमता इससे पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता राम माधव ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के जरिए विवाद आगे बढ़ा दिया। उन्होंने शिंदे की तरफ से खेद प्रकट करने को नाकाफी बताते हुए माफी मांगने की बात की। लेकिन भाजपा इस मामले को तूल देने के मूड में नहीं है। हालांकि संघ के इस रुख के बाद भाजपा असहज स्थिति में है और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद का कहना है कि भाजपा, संघ की पीड़ा समझती है। शिंदे के बयान में माफी शब्द होता तो अच्छा रहता लेकिन बिना शर्त खेद जताना भी माफी मांगने जैसा ही है। शिंदे को पहले ही खुद को संभाल लेना चाहिए था। उन्हें आगे भी अपने पद की गरिमा तथा अपनी टिप्पणियों के नतीजों का ध्यान में रखना चाहिए।
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