यह भी कहा जाता है कि मल्टीप्लैक्स संकुल की अधिकतम आय पॉपकॉर्न, समोसे, पार्किंग और शीतल पेय इत्यादि बेचकर आती है। भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष के इतिहास में 90 वर्षों तक फिल्में दर्शक के धन से बनती रही हैं और आज भी दर्शक ही दे रहा है, परंतु टेलीविजन पर फिल्में सिनेमाघरों से अधिक लोगों द्वारा देखी जा रही हैं। केवल सिनेमा के व्यवसाय में ही लंबा सप्ताहांत महत्वपूर्ण नहीं है, आजकल जीवन के सारे रास-रंग भी सप्ताहांत में सिमट गए हैं। गोयाकि मनुष्य सोमवार से शुक्रवार शाम तक जीवन के लिए जरूरी भागमभाग में खपा रहता है और शुक्रवार रात से सोमवार की सुबह तक अपने रास-रंग में लीन रहता है। जीवन जीने के आनंद को साढ़े पांच या ढाई दिनों के हिस्सों में कैसे बांटा जाता है? हम सोमवार से शुक्रवार तक अपने कार्य में आनंद क्यों नहीं ले सकते? दफ्तर का काम आनंदहीन क्यों और छुट्टियां ही केवल रस से सराबोर क्यों? आनंद और उमंग सारे समय प्रवाहित क्यों नहीं?
बहरहाल, सलमान खान के इस अनुबंध के बाद शाहरुख खान, अक्षय कुमार इत्यादि अन्य सितारे भी कुछ कम या ज्यादा धन में इस तरह का अनुबंध कर सकते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि ‘तलाश’ के निर्माता को थोड़ा-सा ही धन मिला है और अधिकतम अंश का मालिकाना अधिकार नायक आमिर खान का था। अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि फिल्म पर मालिकाना अधिकार सितारे का ही होगा और निर्माता का मेहनताना पहले ही तय हो जाएगा। एक तरह से निर्माता, निर्देशक सितारे की सेवा में होंगे और अभी तक फिल्म के जहाज का कप्तान निर्देशक को माना जाता था, परंतु अब सितारा होगा और निर्देशक मात्र मल्लाह। इस तरह आ रहा है निर्देशक-मल्लाह की नाव में सितारा तूफान। नाव में है तूफान, मल्लाह सावधान।