भाजपा के 'लक्ष्मण' भ्रष्ट करार, जानिए कैसे हुआ था स्टिंग ऑपरेशन
नई दिल्ली. तहलका कांड में दोषी करार दिए गए भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को आज सीबीआई की विशेष अदालत ने 4 साल के सश्रम कारावास के साथ ही एक लाख रुपये के जुर्माना की सज़ा सुनाई है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि समाज में 'सब चलता है' के रवैये के चलते भ्रष्टाचार फैलता जा रहा है। बंगारू लक्ष्मण के वकील ने अदालत के फैसले पर निराशा जाहिर करते हुए कहा है कि वे इसके खिलाफ अपील करेंगे।
बंगारू लक्ष्मण पर 2001 में तहलका ने रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। उस समय केंद्र में भाजपा की नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी। बंगारू भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उन्होंने तहलका टीम से हथियारों का सौदा करवाने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत ली थी। इसके एवज में भरोसा दिलाया था कि वह रक्षा मंत्रालय को कंपनी से सौदा करने की सिफारिश करेंगे। 13 मार्च 2001 को इस घूसखोरी का वीडियो सामने आया था। इसके बाद बंगारू को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अभी वे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं।
तहलका ने 2001 में किया था स्टिंग ऑपरेशन
2001 में बंगारू लक्ष्मण फर्जी हथियार डीलरों से कैमरे पर घूस लेते पकड़े गए थे। ये स्टिंग ऑपरेशन तहलका डॉट कॉम ने किया था। स्टिंग ऑपरेशन में ही वो खुफिया कैमरे पर पैसे लेते पकड़े गए थे। उसके बाद बंगारू को बीजेपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तत्कालीन रक्षा मंत्री और समता पार्टी के नेता जॉर्ज फर्नांडिस को भी इस्तीफा देना पड़ा था। समता पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष जया जेटली ने रक्षा मंत्री के निवास पर पत्रकारों से दो लाख रुपए लिए थे। पार्टी के कोषाध्यक्ष आरके जैन ने पचास हजार और कानपुर के उद्योगपति सुरेंद्र सिंह सुरेका ने एक लाख रुपए की रिश्वत ली थी। इसके बदले उन्हें कंपनी की ओर से अधिकारियों को प्रभावित करना था।
कैसे हुई जांच -
2001 में एनडीए सरकार ने जांच के लिए जस्टिस के. वेंकटस्वामी आयोग बना। जस्टिस वेंकटस्वामी ने जनवरी 2003 में आयोग से इस्तीफा दिया।
- मार्च 2003 में जस्टिस एसएन फुकन आयोग बना। पहली रिपोर्ट में जॉर्ज फर्नांडिस को क्लीन चिट।
- आयोग की अंतिम रिपोर्ट के पहले 2004 में यूपीए सरकार ने फुकन आयोग का काम सीबीआई को सौंपा। उसने नौ केस दर्ज किए।
- सीबीआई ने २००६ में बंगारू लक्ष्मण के खिलाफ चार्जशीट दायर की। बंगारू के अलावा उनके दो निजी सहयोगियों के भी नाम थे।
- मई 2011 में बंगारू लक्ष्मण पर आरोप तय हुए। दो अप्रैल 2012 को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।
- बंगारू लक्ष्मण इस केस की सुनवाई रुकवाने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए। वहां से उन्हें राहत नहीं मिली।
- अन्य आठ प्रकरणों में अब भी सुनवाई चल रही है।





