नई दिल्ली. 'मिनी लंदन' कहे जाने वाले कश्मीर के सोपोर कस्बे से कुछ किलोमीटर पहले झेलम नदी के किनारे शीर जागीर गांव में अफजल गुरु का जन्म हुआ था और उसकी परवरिश भी इसी गांव में हुई थी। गांव तक पहुंचने के लिए सेना के एक शिविर से होकर गुजरना पड़ता है और यह रास्ता कच्चा है। (
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शीर जागीर और उसके आसपास के गांवों में सेब के सैकड़ों बागीचें हैं। इसी गांव में अफजल का दो मंजिला घर है, जिसके आगे लॉन भी है। घर पर ताला लगा हुआ है। कुछ महीने पहले तक यहां अफजल का छोटा भाई हिलाल रहता था। अफजल के मां-बाप के चार बेटे थे। एक गांव वाले के मुताबिक, 'पिछले साल नवंबर में कसाब को फांसी होने के बाद अफजल का भाई काफी डरा हुआ था और उसने अपनी पत्नी को बताया था कि अगला नंबर अफजल का हो सकता है।' गांव वालों के मुताबिक हिलाल और उसकी पत्नी ने बहुत जल्दबाजी में घर छोड़ा था। (
अफजल गुरु को फांसी)
(तस्वीर: युवा अफजल की फाइल फोटो)