संकटमोचक का संकट
संकटमोचकों के साथ भी संकट चलते रहते हैं। प्रणबदा को देखिए। इकलौते संकटमोचक हुआ करते थे। बीच में कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद ने उभरने की कोशिश की, और संकट बढ़ाकर अंतर्धान हो गए। अब चुनौती दे रही हैं मैडम अंबिका सोनी, वह भी प्रणबदा के गृहराज्य में। ममता बनर्जी ने बांग्लादेश यात्रा के दौरान पीएम को अंगूठा दिखाया, राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में अपनी जगह अमित मित्रा को भेजा और सांप्रदायिक हिंसा विधेयक की जमकर धज्जियां उड़ाईं। उनसे बात करने पहुंचीं अंबिका सोनी। लेकिन गृहराज्य के संकट में बाहर का संकटमोचक? संकट की बात तो है।
ऐसा भी संकट
एक और घरेलू मामला। यह भी पश्चिम बंगाल से जुड़ा है। कोलकाता मेट्रो की पांचवीं लाइन बैरकपुर जाती है, जो रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का गृह जिला है। मंत्रीजी हाल देखने खुद वहां पहुंचे। लंबी कतार में आधे घंटे खड़े रहे। जब राउंड ट्रिप का टिकट मांगा, तो कहा गया कि वह तो नहीं है। मंत्रीजी ने पूछताछ करनी चाही, बताया कि भई मैं रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी हूं, तो भाई लोगों को लगा कि मोशाय मजाक कर रहे हैं। बड़ी मुश्किल है।
घरेलू शीत युद्ध
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के निजी सचिव मनोज पंत का कार्यकाल समाप्त हो गया है। उनकी जगह प्रणबदा ने पश्चिम बंगाल में बीरभूम के डीएम सौमित्र मोहन को पीएस बनाने के लिए ममता बनर्जी को पत्र लिखा। लेकिन ममता ने न केवल इस पत्र को नकारा, बल्कि सौमित्र का तबादला भी बीरभूम से कर दिया। प्रणबदा व ममता के बीच चल रहे शीत युद्ध की यह एक और बानगी है।
श्राद्ध पक्ष में ठाठ
श्राद्ध पक्ष में देश के ज्यादातर नए काम सहमे-सहमे से रहते हैं। भाजपा ज्यादा ही सहमी रहती है। उत्तरप्रदेश में सारा कामकाज श्राद्ध के कारण रुका हुआ है। उत्तराखंड में पोखरियाल को फटाफट इसलिए हटाया गया कि श्राद्ध पक्ष फिर शुरू हो जाता तो नई शपथ अटक जाती। लेकिन नरेंद्र मोदी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वह श्राद्ध के दौरान ही उपवास पर बैठे, और ठाठ से बैठे।
मोदी का जवाब
नरेंद्र मोदी का ठाठ नीतीश कुमार को पसंद नहीं आ रहा है। खबरें निकलती हैं, या निकलवा दी जाती हैं कि अगर नरेंद्र मोदी नेता हुए तो नीतीश कुमार नहीं निभा पाएंगे। नरेंद्र मोदी अमूमन सहते रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने भी चुटकी का जवाब चुटकी से और धमकी का जवाब धमकी से दे डाला। एक तरफ तो जयललिता का कार्ड और दूसरी तरफ उपवास के पहले दिन अपने भाषण में मोदी ने कह दिया कि आज भी बिहार से कई लोग कामकाज की तलाश में गुजरात आते हैं और उनके घरवाले भी यह जानकर खुश होते हैं कि वे गुजरात जैसे खुशहाल राज्य में आए हैं। नीतीश ने जरूर सुना होगा।
हिंदी हैं हम..
नरेंद्र मोदी का एक और कार्ड हिंदी का है। पूर्व प्रचारक हैं और उनकी हिंदी बहुत अच्छी है। उपवास के दौरान लगातार हिंदी में बोले। एक भी शब्द गुजराती नहीं। और तो और, उन्हें बाहर से समर्थन देने पहुंचे राज ठाकरे भी हिंदी में बोले। एक भी शब्द मराठी नहीं। ‘मराठी माणुस’ के हिंदी प्रेम का मतलब समझे आप? अगले लोकसभा चुनाव तक मतलब साफ हो जाएगा। हो सकता है अम्मा भी हिंदी बोलती दिखें। वैसे उनकी हिंदी भी काफी अच्छी है।
खबरों का अवैध खनन
जयराम रमेश अपने आपमें खबरों की खदान हैं और यहां से खबरों के अवैध खनन पर कभी रोक नहीं लगी। लिहाजा तमाम खनिक पत्रकार पर्यावरण मंत्रालय में डटे रहते थे। अब जयंती नटराजन पर्यावरण मंत्री बनी हैं, लेकिन ज्यादातर पत्रकार ग्रामीण विकास मंत्रालय में नजर आने लगे हैं, जहां जयराम रमेश मंत्री हैं। जयंती हैरान हैं। कोई उन्हें बताए कि वे अवैध खनन को मंजूरी देंगी, तो ही भीड़ जुटेगी। लोहे-कोयले की नहीं, खबरों के अवैध खनन की।
कांग्रेस ब्यूरो ऑफ..
सीबीआई को भारतीय जनता पार्टी तो कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कहती ही है, सीबीआई की वेबसाइट भी ऐसा ही आभास देती है। हैक होने के बाद बनी नई-नवेली वेबसाइट के पहले ही पृष्ठ पर राजीव गांधी हत्याकांड की जांच का लिंक है और उसमें राजीव गांधी का बड़ा-सा ऐसा चित्र है, जैसा कांग्रेस के दफ्तरों में नजर आता है। क्लिक करके देखिए।
याद आए जगत सिंह
आपको जगत सिंह याद हैं? नटवर सिंह के बेटे,जो फूड-फॉर-ऑयल घोटाले के बाद कांग्रेस से निकाले गए थे। फिर बहुजन समाज पार्टी में गए और वहां से भाजपा में। लेकिन दिखे कभी नहीं। हाल ही में राजस्थान के भरतपुर के गोपालगढ़ में हुए दंगे में आठ लोग मारे गए थे। भरतपुर नटवर सिंह का इलाका है और जब शाहनवाज हुसैन के नेतृत्व में भाजपा का एक दल भरतपुर दंगे की जांच करके लौटा, तो भाजपा मुख्यालय में मंच पर जगत सिंह भी नजर आए। हालांकि वे बोले एक शब्द भी नहीं।
बुरे फंसे मदेरणा
राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा एक सीडी कांड में फंस गए हैं। मारवाड़ की एक चर्चित नर्स पिछली एक सितंबर से लापता है। इसमें मदेरणा का नाम भी आया है। मदेरणा कोई सामान्य मंत्री नहीं हैं। वे प्रसिद्ध गांधीवादी और जानेमाने जाट नेता परसराम मदेरणा के पुत्र हैं। कांग्रेस 1998 में जब सत्ता में आई थी तो पिता मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे और इस बार पुत्र। लेकिन दोनों ही बार अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। राजनीतिक क्षेत्रों में माना जा रहा है कि कांग्रेस में अशोक गहलोत का एक और ताकतवर विरोधी चित हो गया है।