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यहां के लोगों का है नारा : हम दो-हमारे पांच

संतोष ठाकुर | Nov 29, 2012, 10:38AM IST
 
 

नई दिल्ली. चीन के खिलाफ दुनिया में अपना आंदोलन तेज करने के लिए तिब्बत की निर्वासित सरकार ने वैश्विक स्तर पर अपनी आबादी बढ़ाने का निश्चय किया है। इसके लिए निर्वासित सरकार ने अपने नागरिकों को परिवार बढ़ाने और 'एक परिवार- पांच सदस्य' के सिद्धांत पर चलने के लिए प्रेरित करने का निर्णय किया है।

निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री डा. लोबसांग सांगे ने कहा कि हमारी आबादी सीमित है। मुकाबले में चीन है जिसके पास आबादी, धन और शक्ति की कमी नहीं है। हम अहिंसा से तिब्बत के लिए संपूर्ण स्वायत्तता मांग रहे हैं लेकिन चीन वह भी नहीं दे रहा है। वह दुनिया को बस एक पहलु दिखा रहा है कि वह तिब्बत का विकास कर रहा है। यह सही नहीं है। हम अपनी बात दुनिया को बताने में कमजोर हैं, क्योंकि हमारी आबादी सीमित है। ऐसे में हमने अपनी आबादी बढ़ाने का निश्चय किया है।

डा. सांगे ने कहा कि तिब्बत के बाहर करीब डेढ़ लाख तिब्बती हैं। इनमें से करीब 90 हजार भारत में है।

15 हजार नेपाल और 3-4 हजार तिब्बती भूटान में है। इनमें से कई युवा पढ़-लिखकर दुनिया के अन्य मुल्कों में रह रहे हैं। विकास के साथ कदमताल करते हुए ये युवा सीमित परिवार का अनुपालन भी कर रहे हैं। ऐसे में तिब्बती परिवारों में एक या दो बच्चों का चलन शुरू हो गया है। शेष पेजत्न४





हमारी कोशिश है कि हम देश के युवाओं को यह समझाएं कि अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने के लिए हमें लोग चाहिए। ऐसे में हमारी कोशिश है कि हमारे युवा कम से कम 4-5 बच्चों के बारे में सोचें और परिवार बढ़ाने पर अमल करें। उन्होंने कहा कि हमें आबादी इसलिए भी बढ़ानी है क्योंकि हमारा बजट सीमित (करीब 120 करोड़ रुपए सालाना) है।

इसका बड़ा हिस्सा तिब्बत से बाहर बसे तिब्बती जनता से ही आता है। वे हमें स्वयंसेवी आजादी टैक्स देते हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. सांगे, जो स्वयं प्रति माह करीब 16000 रुपए का वेतन पाते हैं, ने कहा कि चीन के मुकाबले के लिए धन की जरूरत भी है, ताकि हम दुनिया तक अपनी बात पहुंचा पाएं। हम आजादी नहीं बल्कि स्वायतता मांग रहे हैं। इससे भी चीन को इनकार है। हम अगले साल 43 देशों में चीन के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और यह संघर्ष उस समय तक जारी रहेगा जब तक हमारा मकसद पूरा नहीं हो जाता है। डा. सांगे ने कहा कि वियतनाम, कोरिया, अरब देशों में दमनपूर्ण कार्रवाई का हश्र सामने आ गया है। चीन भी लोगों की भावना और अधिकार को अधिक समय तक दबाकर नहीं रख सकता है। हम स्वायतता मिलने तक संघर्ष करेंगे। अमेरिका की हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी को छोड़कर तिब्बत की निर्वासित सरकार का प्रधानमंत्री बनने वाले डा. सांगे ने कहा कि अपने देश के लिए प्रत्येक तिब्बती अपना हर ऐशोआराम छोडऩे को तैयार है और हमें यकीन है कि हम चीन को एक दिन यह साबित कर देंगे कि स्वायत्तता हमारा हक है।
 
 
 

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