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मदद करने से मानसिक दबाव कम होता है

bhaskar network | Oct 21, 2012, 09:56AM IST
 
 

हम अक्सर खुद पर किसी न किसी तरह का दबाव महसूस करते हैं जो मालूम नहीं चलता कि क्यों है? जबकि दूसरों को अपना समय देने से या उनकी मदद करने से आप खुद को तनावमुक्त कर सकते हैं। ये कारूरी नहीं कि आप उनके साथ घंटों बिताएं। पांच-दस मिनट भी काफी हैं। हार्वर्ड बिकानेस रिव्यू ने इस संबंध में जानकारी दी है।

बॉस हैं तो क्या, फीडबैक फिर भी जरूरी है

आप संस्थान में जितने ऊंचे पद पर पहुंच जाते हैं, आप अपने आइडिया, परफॉर्मेंस और स्ट्रेटेजी के लिए उतनी कम फीडबैक लेने की कोशिश करते हैं। काम को बेहतर बनाने के लिए दूसरों के विचारों को जानना कारूरी है। आप ये कर सकते हैं-

रिव्यू के समय अपने लिए इनपुट्स न मांगें। लेकिन जब समय मिले तब अपने काम को लेकर इनपुट्स मांगने का यत्न करें।

अगर कोई खुद से इनपुट्स या फीडबैक नहीं दे रहा है तो 360-डिग्री प्रोसेस को फॉलो करें। उन्हें बताएं कि आपके लिए फीडबैक क्यों जरूरी है।

कोई खुद से फीडबैक देने के लिए आगे आ रहा है तो ऐसे लोगों की पहचान करें। उन्हें आलोचना करने को भी कहें। इससे आप में संपूर्ण बदलाव आएगा।

(स्रोत- 'हाउ टु गेट फीडबैक वैन यू आर द बॉस' बाय एमी गैलो)

कम बोलने वालों को बोलने का मौका दें

आपकी टीम में हर तरह के लोग होंगे। कुछ ज्यादा बात करना पसंद करेंगे और कुछ कम बोलते होंगे। लेकिन आपको ऐसे लोगों को आगे लाना चाहिए जो कम बोलते हैं। उनके विचारों को सुनने के लिए आप ये कर सकते हैं-

उनसे काम में आने वाली ताकत और चुनौतियों पर बात करें। लोगों को अपने विचार लिखने दें। उनकी लिखी बातों पर ग्रुप में चर्चा करें।

मीटिंग या डिस्कशन उन लोगों से शुरू करें जो कम बोलते हैं या कुछ भी नहीं बोलते। उन्हें प्लेटफॉर्म या बोलने का मौका दें।

टीम को ये न बताएं कि उन्हें मीटिंग में बोलना हैं या उन्हें अपनी बात कहनी है। लेकिन मीटिंग के दौरान लोगों का चुनाव करें। इससे बाकी सभी लोग उसकी बात की तरफ ध्यान देंगे।

(स्रोत- 'कोलैब्रेशन बाय डिफरेंस' बाय कैथी डेविडसन)


मिथकों को समझने की कोशिश करें

हर संस्थान के अपने मिथक होते हैं। जैसे महान लीडर कौन है? किस तरह के व्यवहार को पसंद किया जाना चाहिए? या उनके ग्राहक क्या चाहते हैं? कॉम्पीटिशन के बावजूद ये मिथक बदलते नहीं हैं। जब कोई सदस्य अपने विचार रखता है तो ये मिथक बढ़ जाते हैं। आप उन विचारों को ठुकरा देते हैं। अगली बार जब कोई नए विचार रखें तो उनसे जुड़े मिथकों के बारे में सोचें। कई बार अपने विचारों की आलोचना करनी मुश्किल हो जाती है। इसलिए किसी तीसरे व्यक्ति की राय लें। उनके विचारों को ध्यान में रख कर अब उन विचारों के बारे में सोचें जिन्हें आप ठुकरा चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया को ध्यान से समझें। इसका मकसद मिथकों को खत्म करना नहीं है। लेकिन इन मिथकों को बेहत तरह से समझना है। (स्रोत- 'द मिथस दैट प्रिवेंट चेज' बाय रोबर्टो वरगांटी)



प्रेजेंटेशन को किस्से कहानी से शुरू करें

श्रोताओं और दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए स्पीच या प्रेजेंटेशन को किसी विचार, प्रश्न, कहानी, उदाहरण से शुरू कर सकते हैं। इससे दर्शक आपकी बातों की तरफ रुझान दिखाएंगे। इसके बाद प्रेजेंटेशन का उद्देश्य या कारूरी पॉइंट्स हाईलाइट करें। मुख्य वक्ता होने के नाते आप खुद से पूछ सकते हैं कि लोगों को लुभाने के लिए सबसे कारूरी क्या है या किसी बुलंद आवाज वाले व्यक्ति को प्रेजेंटेशन की शुरुआत करने को कह सकते हैं। दर्शक आपको ही सुुनना चाहते हैं इसलिए स्पीच शुरू होने के बाद खुद बोलें। प्रेजेंटेशन खत्म करते वक्त दर्शकों को बताएं कि आप क्या समझने की कोशिश कर रहे थे। उनसे बातचीत करें। प्रेजेंटेशन पर आधारित कुछ प्रश्न पूछें। आप ये पूछ सकते हैं कि प्रेजेंटेशन में उन्हें अपनेलिए क्या खास मिला।

(स्रोत- हार्वर्ड मैनेज मेंटर ऑनलाइन मॉड्यूल- प्रेजेंटेशन स्किल्स)
 
 
 

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