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भारतीय राजनीति में हड़कंप मचाने वाले टॉप सेक्स स्कैंडल्स

 
Source: आशीष महर्षि   |   Last Updated 15:16(09/02/12)
 
 
 
 

सियासत में जब जब शराब और शबाब मिली, तब तब बवाल मचा। रेतीले प्रदेश राजस्थान में भी इन दिनों एक ऐसा ही बवंडर आया हुआ है। किस किस को यह बवंडर अपनी चपेट में लेगा, देखना बाकी है। जिस वीरों की भूमि में कभी वीर रस की कविताएं गूंजा करती थीं। आज वहां भंवरी-मदेरणा की सेक्स गाथा कही जा रही है। हालांकि इस भंवर में लूणी विधायक मलखान सिंह, उनके भाई परसराम, और खुद भंवरी का पति अमरचंद भी बुरी तरह फंस चुके हैं। सियासत पहली बार शर्मसार नहीं हुई है। पहले भी कई सियासत नंगी हुई तो अवाम शर्मसार हुई लेकिन इन औरतखोर नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ा।


हर बार कीमत उस जिस्म को ही चुकानी पड़ी, जिसके नशे में सियासतन मदमस्त होकर सियासत करते रहे। राजस्थान का मामला भले ही नया हो लेकिन राजनीति में शराब और शबाब के साथ सेक्स की परंपरा बरसों से हिंदुस्तानी सियासत में चली आ रही है। जब जब सेक्स और सियासत की कोकटेल सामने आई, हंगामा मचा।
हमारे महान ग्रंथों से लेकर महाकाव्यों तक में हर बार कीमत महिलाओं ने ही चुकाई है। यकीन नहीं होता है तो सतयुग से त्रेतायुग तक चले जाइए। मसलन रामायण की सीता को देख लीजिए। महाभारत की कंुती, दौपद्री पर नजर डाल लीजिए।
सृष्टि के रचयिता माने जाने वाले ब्रह्म और ज्ञान की देवी सरस्वती के संबंध पर नजर दौड़ा लीजिए। हर बार भोगना सिर्फ और सिर्फ महिलाओं को ही पड़ा। महिला आंदोलन में एक थ्यौरी बड़ी प्रचलित है। ट्रेपिंग इन इमोशनल। यानी एक महिला की भावनाओं पर नियंत्रण करते हुए उसे अपने चंगुल में फंसाना। आइए ऐसे ही कुछ मामलों पर एक नजर डालते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी भी सेक्स स्कैंडल में फंसे थे। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रह चुके नारायण दत्त तिवारी का रंग रसिया रूप देश की जनता ने कई बार देखा है।


पिछली बार, तिवारी सेक्स स्कैंडल के कारण खूब चर्चा में रहे। आधे घंटे तक एक तेलुगू चैनल पर जब तिवारी की कथित रासलीला का प्रसारण किया जा रहा था तो इसकी गंूज पूरे हिंदुस्तान में सुनी गई।इस क्लिप में एक बूढ़ा जिस्म तीन महिलाओं के साथ अपनी हवस की आग बुझाता हुआ दिखा। कहा गया कि यह और कोई नहीं, बल्कि नारायण दत्त तिवारी हंै। 85 साल के तिवारी का नाम इससे पहले भी कई दफा कई महिलाओं के साथ जुड़ा। जम्मू व कश्मीर के युवा मुख्यमंत्री उमर अब्दुला भी सेक्स स्कैंडल में फंस चुके हंै। हालांकि बाद में वे पाक साफ निकले।
मामला 2006 के एक सेक्स स्कैंडल का है। श्रीनगर पुलिस ने जब सबीना नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया तो उसने कई चैंकाने वाले खुलासे किए। नतीजा मुख्यमंत्री के साथ कई पूर्व मंत्री और आला अधिकारी इस सेक्स स्कैंडल में फंसे। पूरे राज्य में कोहराम मचा। कुल 18 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इसमें राज्य के दो पूर्व मंत्री समेत एक आईएएस अधिकारी, एक डीआईजी एवं दो डीएसपी शामिल थे।
ऐसा ही कुछ पिछले लोकसभा चुनाव में बाॅलीवुड अभिनेत्री और सपा की उम्मीदवार जयाप्रदा के साथ हुआ। बरसों तक बड़े परदे पर अपने हुस्न का जलवा दिखा चुकीं जया उस वक्त रो पड़ीं, जब उन्होंने अपने ही अश्लील पोस्टर रामपुर में देखे। रामपुर उनका संसदीय क्षेत्र है। रामपुर की गलियों से निकलकर ये पोस्टर दिल्ली तक की राजनीति में बवाल मचाया।जया की आंखों में आंसू तक आए। इल्जाम बागी नेता आजम खान पर लगा। यह बात खुद जया ने कही। वैसे मीडिया में अक्सर जया और अमरसिंह के संबंधों को लेकर भी छीटाकशी होती रहती है। जयाप्रदा कहती हैं कि राजनीति में यदि आए हैं तो दाग तो लगेंगे ही।
एक कवयित्री के साथ मंत्री का अमरप्रेम अपनी कविताओं ने कइयों के दिल पर राज करने वाली मधुमिता की उसके घर पर ही गोलीमार कर हत्या कर दी गई। घटना मई 2003 की है। लखनऊ की पेपर मिल काॅलोनी ने उस दिन गोलियों की आवाज सुनी थी। जब लाश का पोस्टमार्टम हुआ तो चैंकाने वाली खबर बनना लाजिमी थी। मधुमिता गर्भवती थी।


शक की सुई तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी की ओर मुड़ी। लखनऊ की जनता के साथ अब पूरा देश दोनों के संबंधों को जान चुका था। हत्या के पीछे वजह यह बताई गई कि मधुमिता-अमरमणि त्रिपाठी के संबंधों के कारण वह गर्भवती हो गई थी लेकिन अमरमणि नहीं चाहते थे कि वह मां बने। मधुमिता अपनी जिद पर अड़ी थी। अंत में मधुमिता को गोली मार दी गई। फिलहाल अमरमणि जेल में हैं। उत्तर प्रदेश के एक मंत्री आनंद सेन की जिंदगी में भी एक लड़की आई।


वह लाॅ की स्टूडेंट शशि थी। शशि अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए आनंद सेन के करीब होती गई। शशि चाहती थी कि वह विधानसभा का चुनाव लड़े और लखनऊ की विधानसभा में बैठे। शार्टकट के रूप में उसने आनंद सेन को चुना। शशि के पिता खुद एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे। आनंद सेन ने भी उसकी आंखों में बसे इस ख्बाव को देख लिया था। फिर शुरू हुआ वायदों का दौर।वायदे बढ़ते गए, जिस्मानी दूरियां मिटती र्गइं। 22 अक्टूबर 2007 को शशि गायब हुई। लंबी छानबीन और धड़पकड़ के बाद पता चला कि वह इस दुनिया से जा चुकी है। उसकी हत्या हो गई है। 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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