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आईएसआई के दबाव में जरदारी ने किया भारत से धोखा?

dainikbhaskar.com | Jun 27, 2012, 08:46AM IST
 
 


नई दिल्‍ली.पाकिस्‍तान में सजा-ए-मौत पा चुके सरबजी‍त सिंह की रिहाई को लेकर राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी क्‍यों पलट गए? यह सवाल भारत के साथ पाकिस्‍तान में भी उठ रहा है। लेकिन भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्‍णा के एक बयान ने विवाद को हवा दे दी है। 
मंगलवार को पीटीआई सहित तमाम मीडिया में खबर आई कि सरबजीत की रिहाई के जरदारी के फैसले से खुश कृष्‍णा ने उन्‍हें धन्‍यवाद कहा था। लेकिन बुधवार को कृष्‍णा ने इससे इनकार कर दिया। उन्‍होंने सुरजीत की रिहाई का स्‍वागत करते हुए सरबजीत सहित तमाम भारतीय कैदियों की पाकिस्‍तान से रिहाई की मांग की।
पाकिस्‍तान में माना जा रहा है कि जरदारी दबाव के कारण पलट गए। मानव अधिकारों के पैरोकार अंसार बर्नी ने साफ कहा है कि जरदारी को किसी दबाव के आगे नहीं झुकना नहीं चाहिए था। उन्‍होंने कहा कि हो सकता है कि जरदारी मुल्‍लाओं से डर गए हों या फिर उन्‍हें मुल्‍क के मौजूदा हालात को देखते हुए पलटना पड़ा होगा, लेकिन उन्‍हें किसी दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए था। पीटीआई के इस्‍लामाबाद संवाददाता रियाज उल लश्‍कर का भी कहना है कि राष्‍ट्रपति ने शायद फौज के दबाव में आकर पलटी मारी होगी।
पाकिस्‍तान में मंगलवार शाम से ही मीडिया में खबरें चलने लगीं कि राष्‍ट्रपति ने फैसला किया है कि सरबजीत सिंह रिहा होंगे। इसे लेकर वहां मीडिया पर बहस भी चलने लगी। तभी रात करीब 12 बजे राष्‍ट्रपति की ओर से सफाई जारी हुई कि रिहाई सरबजीत की नहीं, सुरजीत की हो रही है। लेकिन बर्नी का कहना है कि सुरजीत सिंह की रिहाई के लिए राष्‍ट्रपति को कोई कदम उठाने की जरूरत ही नहीं है। वह सजा पूरी कर चुके हैं और कानूनन उनकी रिहाई हो जानी है। जरदारी को तो सरबजीत पर ही फैसला लेना है। 
इससे पहले पाकिस्‍तानी मीडिया का भी रुख बदल गया। मीडिया पर बहस में बताया जाने लगा कि लोग इस तरह की रिहाई के खिलाफ हैं। बहस में एक मोहतरमा ने कहा कि ऐसे माहौल में जहां आतंकवादियों को पकड़ना और सजा दिलाना मुश्किल है, इस तरह से रिहाई का अच्‍छा संदेश नहीं जाएगा। पाकिस्‍तान के हालात बेहद खराब हैं। विश्‍लेषक  वेद प्रताप वैदिक के मुताबिक कहा जाता है कि अल्‍लाह, आर्मी और अमेरिका पाकिस्‍तान के साथ हों तो कोई उसका बाल बांका नहीं कर सकता, लेकिन लगता है कि तीनों उससे रूठ गए हैं।
भारत में भी सरकारी सूत्र मानते हैं कि आईएसआई ने जरदारी को फैसला बदलने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे समय में जब भारत ने अबु हमजा की गिरफ्तारी कर पाकिस्‍तान पर दबाव बनाने की कोशिश की है, आईएसआई की नजर में सरबजीत को रिहा करना सही नहीं होगा।
भारत से 'धोखे' की इस खबर को पाकिस्‍तानी मीडिया ने जरा भी तवज्‍जो नहीं दी है। प्रमुख अखबार 'डॉन' ने खबर को जरा भी प्रमुखता नहीं दी है। अखबार की वेबसाइट पर एक छोटी सी खबर पोस्‍ट की गई है। इसमें राष्‍ट्रपति के प्रवक्‍ता का बयान छापा गया है, जिसमें उन्‍होंने कहा है कि सरबजीत नहीं सुरजीत की रिहाई होने वाली है। लेकिन इस खबर से यह जरूर साफ हो रहा है कि पहले सरबजीत सिंह की रिहाई का ही फैसला हुआ था, क्‍योंकि इसमें कहा गया है कि पाकिस्‍तान ने 'यू टर्न' ले लिया है। एक और अखबार 'नेशन' ने खबर को प्रमुखता से पहले पन्‍ने पर छापा है और बताया है कि 'भारतीय जासूस' की रिहाई को लेकर राष्‍ट्रपति पलट गए हैं।
पलटा पाकिस्तान: सरबजीत नहीं सुरजीत सिंह की होगी रिहाई

 
 
 

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