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कठिन फैसलों से सरकार को विकास की आस

पंकज कुमार पांडेय | Feb 22, 2013, 12:47PM IST
 
 

 
नई दिल्ली. बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण से ठीक पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था में वैश्विक मंदी के असर का उल्लेख करके बजट में कुछ कड़वी खुराक के संकेत दे दिए। बाद में राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी इसकी छाया नजर आई। राष्ट्रपति ने भी वैश्विक मंदी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बारहवीं योजना में विकास के नतीजे हमें तभी हासिल होंगे जब हम कठिन फैसले ले पाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार की योजनाओं की संख्या समेकित करके कम करने और इन्हें लचीला बनाने का प्रस्ताव है। राष्ट्रपति के अभिभाषण और प्रधानमंत्री के बयान से संकेत साफ हैं कि सरकार का आगामी बजट में खर्च कम करने पर खास जोर होगा। सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में पैसा बहुत कम बढऩे की संभावना है। साथ ही जो भी नई योजनाएं होंगी उन्हें अमल में लाने के लिए कुछ सालों का इंतजार करना होगा। यानी उनके लिए भी तुरंत एकमुश्त पैसा देना सरकार के लिए संभव नहीं होगा। सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), मिड डे मील सहित तमाम फ्लैगशिप योजनाओं में पैसा बढ़ाने का संकेत तो दिया है लेकिन यह मौजूदा जरूरतों से बहुत कम होगा। 
 
पैसा कम वित्तीय प्रबंधन पर फोकस: मसलन एसएसए में सरकार इस बार करीब 27 हजार 258 करोड़ रूपए का आवंटन कर सकती है। यह पिछले साल दिए गए 25 हजार 555 करोड़ रुपए से तो ज्यादा है। लेकिन राइट टू एजुकेशन के लिए जरूरी भारी भरकम राशि के लिहाज से काफी कम है। इसी तरह मिड डे मील में भी पिछले साल दिए गए 11 हजार 937 करोड़ रुपए की तुलना में इस बार 13 हजार 215 करोड़ रुपए के आवंटन का संकेत दिया है। मगर राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस योजना का पूर्व प्राथमिक स्कूलों में दायरा बढ़ाने की घोषणा इतनी रकम में संभव नहीं है। सरकार का फोकस खर्च कम करने और वित्तीय प्रबंधन पर ज्यादा होगा। यानी उपलब्ध पैसे का उपयोग सही तरीके से हो। 
 
यह रहेंगी महज घोषणा: राष्ट्रपति के अभिभाषण में खाद्य सुरक्षा कानून पारित कराने की बात कही गई है। मगर सरकार के लिए अभी इसके लिए जरूरी रकम दे पाना मुश्किल। अभिभाषण में राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान शुरू करने का जिक्र किया है। मगर सरकार ने उच्च शिक्षा के मद में भी बहुत कम बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। लिहाजा इस बड़ी योजना पर आगामी बजट सत्र में अमल संभव नहीं। सीधे नकदी सब्सिडी के लिए बजटीय प्रावधान होगा। महिला व बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए भी सरकार के पास बहुत ज्यादा पैसा नहीं होगा। इस बार करीब 26 हजार करोड़ रुपए मंत्रालय की योजनाओं के लिए दिए जा सकते हैं। लेकिन कुल बढ़ोतरी 9 फीसदी के आस पास ही होगी। सबसे ज्यादा पैसा आईसीडीएस स्कीम को मिलेगा। 
 
क्या कहा पीएम ने: प्रधानमंत्री ने कहा विश्व अर्थव्यवस्था धीमी पडऩे से उत्पन्न विकट चुनौतियों का देश पर कम से कम असर हो, इसके लिए सबको विश्वसनीय कदम उठाने की जरूरत है। संसद सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व अर्थव्यवस्था मंद पड़ी है। उन्होंने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था की मंदी का असर भारत पर भी है। हम संसद में वित्तीय कामकाज कैसे निपटाते हैं यह इस मायने में अहम होगा कि देश इन बड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करता है। हम सबके सहयोग की उम्मीद करते हैं। 
 
 
‘बेटी’ के परिजनों को नि:शुल्क फ्लैट 
केंद्र सरकार दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म की शिकार ‘दामिनी’ के परिजनों को निशुल्क एमआईजी फ्लैट देगी। यह फैसला गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। यह फ्लैट दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) देगा। इसका खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। कैबिनेट ने प्रभावित परिवार को निशुल्क फ्लैट देने के लिए डीडीए की मौजूदा नियमावली में छूट दी। साथ ही बिना बारी के फ्लैट आवंटित करने की अनुमति दी है। कैबिनेट ने घाटे में चल रहे नौ केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों की अदायगी के लिए 122.65 करोड़ मंजूर किए हैं। इन बीमार सार्वजनिक उपक्रमों में हिन्दुस्तान केबल लिमिटेड, एचएमसी लिमिटेड, एचएमटी वॉच लिमिटेड, एचएमटीसीडब्ल्यू लिमिटेड, नगालैंड पल्प एंड पेपर कंपनी लिमिटेड, त्रिवेणी स्ट्रक्चर लिमिटेड, तुंगभद्र स्टील प्रोडक्ट लिमिटेड, नेपा लिमिटेड और एचएमटी बियरिंग लिमिटेड शामिल हैं। 
 
 
 
 
 

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