इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि अमेरिका ने भारत के परमाणु परीक्षण को रोकने के लिए जापानी प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। दस्तावेजों के अनुसार नरसिम्हा राव ने बाद में परमाणु परीक्षण की योजना को टाल दिया लेकिन 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में भारत ने 11 और 13 मई को इसे अंजाम दिया। भारत के परमाणु परीक्षणों की इस घटना ने अमेरिका की खुफिया इकाई को हैरत में डाल दिया जो भारत की इस सफलता के समय और तिथि का अनुमान नहीं लगा पाया था। हालांकि सैटेलाइट तस्वीरों ने उसे पहले ही आगाह कर दिया था।
एनएसए ने कहा कि 1995 और उसके पहले के अनुभवों से सीख लेते हुए भारतीयों ने विशेष अभियान के तहत परमाणु परीक्षणों के अपनी तैयारियों को छिपा लिया था, जिसमें पोखरण परमाणु हथियार परीक्षणों की गोपनीय तैयारियां भी शामिल हैं।
(फोटो: 1998 में पोखरण में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण के बाद मौके पर मौजूद तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी)
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