लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान समाप्त हो गया। 10 जिलों के 1.71 करोड़ वोटरों ने 862 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में लॉक कर दी। छह मार्च को चुनाव के परिणाम आ जाएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में करीब ६२ से ६४ फीसदी मतदान हुआ है। बारिश थमने के बाद धूप खिलने से लोग मतदान के लिए घरों से निकले। शाम तक मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।
दिन चढ़ा, मतदान बढ़ा
सुबह से हो रही बारिश के कारण कम लोग मतदान के लिए निकले, लेकिन बाद में मतदान केंद्रों पर लोगों की कतार बढ़ने लगी। सुबह नौ बजे तक जहां 5.17 फीसदी मतदान हुआ था, वहीं 11 बजे मतदान का फीसदी 13.38 फीसदी पर पहुंच गया। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, तीन बजे मतदान का प्रतिशत बढ़कर 42 फीसदी हुआ। शाम पांच बजे तक करीब 45 फीसदी मतदान हुआ है।
बहराइच में झड़प
बहराइच में सपा और निर्दलीय प्रत्याशी समर्थकों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने स्थिति संभाल ली है। घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। इस छोटी सी झड़प के अलावा कहीं से भी किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं मिली है।
नेता जी कहिन
वोट डालने पहुंचे भाजपा नेता विनय कटियार ने कहा, 'यूपी में कांग्रेस और बसपा के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग मतदान डाल रहे हैं। इस बार लोग विकास को तरहीज दे रहे हैं।'
वहीं अयोध्या में राष्ट्रीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत ज्ञानदास ने कहा, 'हर किसी को मतदान करना चाहिए। वर्षों में एक बार तो ऐसा सुअवसर मिलता है, ऐसे में इससे लोगों को चूकना नहीं चाहिए। हमें अपने मताधिकार का प्रयोग करके स्वच्छ नेता का चुनाव करना चाहिए।'
वोट डालने के बाद केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा, 'पीएल पुनिया पंजाब से आए हैं। बाराबंकी में हमारे लोग हैं। इसलिए हमारा जीतना निश्चित है। मेरा बेटा भी भारी मतों से जीत हासिल करेगा। उसके विरोधियों की जमानत जब्त हो जाएगी। हम सभी सीटों पर जीत रहे हैं।'
ईवीएम में बंद हो गई 862 उम्मीदवारों की किस्मत
यूपी के 10 जिलों में 55 सीटों पर हुए मतदान के तहत 1.71 करोड़ वोटर ने 862 उम्मीदवारों की किस्मत तय कर दी। इसके लिए 13186 मतदान केंद्र बनाए गए थे। यहां 19383 इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें इस्तेमाल की गईं। पहले चरण के चुनाव के लिए 6855 मतदान केंद्रों को संवेदनशील माना गया था। चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त तरीके से सम्पन्न कराने के लिए दो लाख से ज्यादा केंद्रीय बलों तथा पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। सुरक्षा की कमान केंद्रीय बलों के हाथ में थी, जबकि राज्य पुलिस उनका सहयोग कर रही थी।