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हां, मैं रक्षा सौदे के दलाल से मिला था: पूर्व वायुसेना प्रमुख

dainikbhaskar.com | Feb 14, 2013, 09:00AM IST
हां, मैं रक्षा सौदे के दलाल से मिला था: पूर्व वायुसेना प्रमुख
नई दिल्‍ली। सीबीआई ने वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टरों की खरीद से जुड़ी डील में रिश्‍वत मामले की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई के अधिकारी गुरुवार को रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से मिले। वहीं, दूसरी ओर रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में श्‍वेत पत्र जारी किया है। सात पन्‍नों के इस श्‍वेत पत्र में बताया गया है कि वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टरों की खरीद मामले में किस तरह एनडीए सरकार शामिल थी। संसद के बजट सत्र से पहले रक्षा मंत्रालय के इस कदम को विपक्ष के हमलों से बचने की सरकार की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने कहा है कि यदि इटली की कंपनी फिनमेक्‍कनिका इस मामले में दोषी पाई जाती है तो उसे ब्‍लैकलिस्‍ट किया जा सकता है। सरकार ने फिनमेक्‍कनिका से यह साफ करने को कहा गया है कि उसकी तरफ से भारत में किसी एक शख्‍स को रिश्‍वत दी गई या किसी कंपनी को।  
 
इटली के कोर्ट में पेश जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद मामले में वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी को रिश्वत दी गई थी। त्यागी ने बुधवार को कहा, ‘हां, मैं कार्लो गेरासो (सौदे के दलाल) से अपने कजिन के घर पर मिला था, लेकिन मैंने इस मामले में कोई रिश्वत नहीं ली है। सौदे के लिए नियम- कायदे बदलने के लिए उन्होंने तत्कालीन एनडीए सरकार को जिम्मेदार बताया।
 
विवादों से घिरे त्‍यागी ने अपने गुड़गांव स्थित घर पर एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए कहा, " मैं सिर्फ एक फाइटर पायलट हूं, जो 6 साल से रिटायर्ड जिंदगी जी रहा है।" पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एस पी त्यागी ने इस मामले में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्र पर उंगली उठा दी है। इसके बाद भाजपा बैकफुट पर आ गई है। त्‍यागी का कहना है कि उन्‍हें प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्देश मिले थे। हालांकि, त्‍यागी यह भी मानते हैं कि उन पर किसी किस्‍म का राजनीतिक दबाव नहीं था। 
 
एस पी त्यागी ने कहा कि हेलिकॉप्टर की ऊंचाई के लिए तय पैरामीटर वर्ष 2003 में बदले गए। तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र ने ऐसा करने को कहा था। त्‍यागी का दावा है कि ठेके का नियम बदलने का फैसला तत्कालीन पीएमओ का था। 
 
इस मामले की 64 पेज की शुरुआती जांच रिपोर्ट इटली के कोर्ट में पेश की गई है। इसमें कहा गया है कि त्यागी को रिश्वत दी गई है। इटली की कंपनी के प्रमुख ओरसी को इसी रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि कंपनी ने 3600 करोड़ रुपये के सौदे के लिए 362 करोड़ की रिश्वत भारत और इटली में बांटी। 
 
रिश्वत के आरोपों से घिरे एसपी त्यागी पहले भी विवादों में रहे हैं। उन पर सियाचिन से सेना बुलाने की कोशिश का आरोप सेना के ही अधिकारियों ने लगाया था। आरोप है कि इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ जहांगीर करामात से कई दौर की बातचीत की। दुबई, बैंकाक और लाहौर में मुलाकातें भी की। त्यागी ने बातचीत का एजेंडा सेट करने से पहले साथियों से कहा कि वे पीएमओ के सीनियर अधिकारी से मिल चुके हैं। 
 
बोफोर्स और इसमें सौदे में कोई समानता नहीं : खुर्शीद 
 
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि बोफोर्स तोप घोटाले और हेलिकॉप्टर सौदे में कोई समानता नहीं है। कानून के अनुसार जो भी किया जाना है, किया जाएगा। विपक्ष को संतुष्ट करने के लिये या किसी के दबाव के कारण कुछ नहीं किया जाएगा। 
 
...और राजनीति 
 
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है, ‘सरकार घोटाले में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक करे। इस मामले में रक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी की भी जवाबदेही तय हो।’ उन्होंने कहा कि इटली में इस मामले में एक साल से जांच चल रही थी। सरकार बताए कि इसके बावजूद उसने अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया। 
 
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस सौदे की शुरुआत 2003-04 में हुई थी। तब केंद्र में एनडीए की सरकार थी। इसलिए यूपीए सरकार पर आरोप लगाना ठीक नहीं है। 
 
आरोप क्या लग रहे हैं? 
 
आरोप यह है कि तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी ने सौदे के लिए रिश्वत ली थी। यह दावा इटली की कोर्ट में पेश जांच रिपोर्ट के हवाले से किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एसपी त्यागी को जूली त्यागी, डोस्का त्यागी और संदीप त्यागी के जरिए रिश्वत की रकम पहुंचाई गई। ये तीनों एसपी त्यागी के रिश्तेदार हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगस्ता वेस्टलैंड को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने के लिए अनुबंध शर्तें बदली गईं। एसपी त्यागी ने टेंडर की डिटेल बदली। 
 
त्यागी का तर्क 
 
एसपी त्यागी का कहना है कि नियमों में बदलाव 2003 में हुआ, जबकि वह 2004 में वायुसेना प्रमुख बने। डील 2010 में हुई, जबकि 2007 में वह रिटायर हो गए थे। 
 
362 करोड़ की घूसखोरी 
 
भारत ने अपनी वायुसेना के लिए इटली की कंपनी से तीन इंजन वाले 12 डब्ल्यू-101 हेलिकॉप्टर लेने का सौदा किया था। 3 हेलिकॉप्टर मिल भी चुके हैं। यह सौदा 2010 में हुआ था, जो करीब 3600 करोड़ का था। आरोप है कि कंपनी ने डील में शामिल होने के लिए 362 करोड़ रुपये की घूस दी। 
 
सरकार ने क्या कदम उठाए 
 
सौदे में दलाली के आरोप सामने आने के बाद सोमवार को इतालवी कंपनी के सीईओ जिउसिप्पे ओरसी को इटली में गिरफ्तार किया गया था। इसके तुरंत बाद रक्षा मंत्रालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की थी। बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने आपात बैठक बुलाई। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर एसआईटी या सीवीसी से जांच की मांग की गई। 
 
कौन हैं त्‍यागी 
 
एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी यानी शशींद्र पाल त्यागी। इनका उपनाम बंडल भी है। 14 मार्च 1945 को इंदौर में जन्मे बंडल उर्फ शशींद्र पाल त्यागी महज 18 बरस की उम्र में पायलट बन गए थे। 1965 और 1971 की जंग में दुश्मन को अपना लोहा मनवाया। श्रेष्ठ पायलटों में शुमार त्यागी को 1980 में ही जगुआर उड़ाने का मौका मिल गया। जगुआर इसी साल वायु सेना में शामिल हुआ था। इसे उड़ाने के लिए त्यागी समेत आठ पायलट चुने गए थे। परम विशिष्ट सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित त्यागी 31 दिसंबर 2004 को शीर्ष पर पहुंचे। साल 2007 तक 20वें एयर चीफ मार्शल रहे। जयपुर में पले-बढ़े त्यागी को वायुसेना का इन्साइक्लोपीडिया कहा जाता है। उन्होंने सिर्फ लड़ाइयां ही नहीं लड़ी, रक्षा मामलों के अध्येता भी रहे हैं। पाकिस्तान सीमा पर वायुसैनिक अड्डे की कमान संभाली। एयर ऑफिसर कमांडिंग रहे। प्रशिक्षण संस्थान टैकडे में कमांडिंग अधिकारी की भूमिका निभाई। एयर स्टाफ इंटेलिजेंस और ऑपरेशंस के सहायक प्रमुख का दायित्व भी संभाला। इसके अतिरिक्त वह रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान में वरिष्ठ फेलो के रूप में भारत की रक्षा नीति के अग्रणी विश्लेषक भी रहे। 
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