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क्‍या है गॉड पार्टिकल? क्‍या होगा फायदा?

dainikbhaskar.com | Jul 04, 2012, 11:02AM IST

हिग्स बॉसन या गॉड पार्टिकल विज्ञान की एक ऐसी अवधारणा है जिसे अभी तक प्रयोग के जरिए साबित नहीं किया जा सका है। अगर इसकी मौजदूगी के प्रमाण मिलते हैं तो ये पता लग सकेगा कि कणों में भार क्यों होता है। साथ ही ये भी पता चल सकेगा कि ब्रह्रांड की उत्‍पत्ति कैसे हुई होगी। हिग्स बॉसन के बारे में पता लगाना भौतिक विज्ञान की सबसे बड़ी पहेली माना जाता रहा है। 1993 में नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकविद लियोन लेडरमैन ने द गॉड पार्टिकल नामक किताब लिखी थी।
 
भार या द्र्व्यमान वो चीज है जो कोई चीज अपने अंदर रख सकता है। अगर कुछ नहीं होगा तो फिर किसी चीज के परमाणु उसके भीतर घूमते रहेंगे और जुड़ेंगे ही नहीं। इस सिद्धांत के अनुसार हर खाली जगह में एक फील्ड बना हुआ है जिसे हिग्स फील्ड का नाम दिया गया। इस फील्ड में कण होते हैं जिन्हें हिग्स बॉसन कहा गया है। इलेक्‍ट्रॉन, प्रोटॉन और न्‍यूट्रॉन से अणु बनता है। गॉड पार्टिकल से इस अणु को भार मिलता है। जब कणों में भार आता है तो वो एक दूसरे से मिलते हैं।
 
हालांकि कणों में भार आने और उनके मिलने की बात समझ में आती है लेकिन अभी तक कोई प्रयोग हिग्स कणों की मौजूदगी का प्रमाण नहीं दे सका है। पार्टिकल या अति सूक्ष्म तत्वों को वैज्ञानिक दो श्रेणियों में बांटते हैं-स्टेबल यानी स्थिर और अनस्टेबल यानी अस्थिर। जो स्टेबल पार्टिकल होते हैं उनकी उम्र बहुत लंबी होती है। जैसे प्रोटोन अरबों खरबों साल तक रहते हैं जबकि कई अनस्टेबल पार्टिकल ज्‍यादा तक ठहर नहीं पाते और उनका रुप बदल जाता है।   वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह हिग्स बोसोन का अंत होने से पहले उसका रुप बदलता है उस तरह के कुछ अति सूक्ष्म कण देखे गए हैं इसलिए उम्मीद पैदा हो गई है कि यह प्रयोग सफल होगा।

 

यह होगा फायदा
गॉड पार्टिकल के रहस्‍य से पर्दा हटने का फौरी तौर पर फायदा यह होगा कि वैज्ञानिकों का 60 साल पुराना यह असमंजस खत्‍म हो जाएगा कि किसी चीज को आकार और द्रव्‍यमान कैसे मिलता है? इसके अलावा और भी कई अनसुलझे सवाल हैं जिनका जवाब मिलने की उम्‍मीद है। यह भी पता चल सकेगा कि धरती के भीतर धधकते ज्‍वालामुखी को इतनी ऊर्जा कहां से मिलती है?
 
अगर गॉड पार्टिकल के मिलने का दावा सही साबित होता है, तो यह साबित हो जायेगा कि भौतिक विज्ञान सही दिशा में काम कर रहा है। इससे भौतिकी के स्टैंडर्ड मॉडल की भी पुष्टि हो जायेगी और यह भी साबित हो जायेगा कि हर चीज ठोस क्यों होती है। क्योंकि यदि हिग्स बोसोन यानी गॉड पार्टिकल का पता नहीं चलता तो स्टैंडर्ड मॉडल फेल हो जाता और हर चीज के ठोस होने की वजहों का भी पता नहीं चल पाता। विज्ञान के लिए यह बड़ा झटका होता और तब गणित पर भी सवाल उठने लगता।

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