इस आंकड़े से सवाल उठता है कि क्या भारतीय अरबपतियों की दौलत का राज सरकार से उनकी नजदीकी है? क्योंकि अधिक 'इकोनॉमिक रेंट' (किसी संसाधन से होने वाली वो आय जो उस संसाधन के सबसे बेहतर उपयोग के बाद होने वाली आय से अतिरिक्त हो) वाले सेक्टर से जुड़े उद्योगपतियों के पास सबसे ज्यादा दौलत है। उन सेक्टरों में 'इकोनोमिक रेंट' अधिक होता है जिनमें सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है या फिर जिन पर एक ही कंपनी का एकाधिकार होता है। उदाहरण के तौर पर जमीन, कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन, स्पेक्ट्रम आदि में 'इकोनॉमिक रेंट' सर्वाधिक होता है क्योंकि इन पर सरकार का अधिकार है और इन्हें हासिल करने के लिए सरकार के साथ करार भी करना होता है।
(PHOTO: भारत में रियल एस्टेट की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक डीएलएफ के मालिक के पी सिंह)