रविवार की घटना से पहले भी दिल्ली में चलती गाड़ी में गैंगरेप की कई वारदात हो चुकी हैं। वर्ष 2010 में धौलाकुंआ इलाके से एक युवती को जीप में अगवा कर अपराधी मंगोलपुरी ले गए थे और गैंगरेप किया था। कुछ साल पहले भी कार सवार अपराधी इसी इलाके में एक युवती को अगवा कर ले गए और उनके साथ चलती कार में रेप किया। इन सभी मामलों में रात को गश्त और चेकिंग के पुलिस के दावे की पोल खुल गई थी।
सरकार ने हर घटना के बाद बड़े वादे किए, लेकिन गश्ती और सड़कों पर पर्याप्त रोशनी जैसी बुनियादी इंतजाम पुख्ता कराने तक में वह नाकाम रही। रेप करने वालों को जल्द से जल्द दोषी ठहरा कर सख्त से सख्त सजा दिलाने की बातें भी कागजी और हवा हवाई भी बन कर रह गई हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल बनता है कि क्या असल में बलात्कार की असली गुनहगार सरकार ही है?
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