टीम का विश्वास जीतें, जीत तय करें
ऑफिस में अच्छे माहौल और आउटपुट को बढ़ाने में बॉस अहम भूमिका निभाता है। बॉस के मार्गदर्शन से टीम आगे बढ़ती है। अच्छे नतीजो के लिए दोनों का एक दूसरे पर विश्वास होना कारूरी है। यह रिश्ता सच के आधार पर बनता है। हार्वर्ड बिकानेस रिव्यू ने इन्हीं रिश्तों के जरिए लक्ष्य को हासिल करने के टिप्स दिए हैं। आइए जानें....
मैनेजर्स और कंपनी में काम करने वाले कुछ लोगों को रीऑर्गेनाइज करना पसंद होगा। क्योंकि कंपनी के स्ट्रक्चर में बदलाव आने से कंफ्यूजन कम होता है। ऑर्गेनाइजेशनल चार्ट बनाने से पहले इन दो बातों का ध्यान रखें-
किस समस्या का हल तलाश रहे हैं?
स्ट्रक्चर में बदलाव लाकर आप कस्टमर पर ध्यान दे रहे हैं? या खर्चों को कम करना चाहते हैं? या फिर इसका कोई तीसरा कारण भी है। बदलाव से पहले अपना लक्ष्य तय कर लें। इससे आपको पता होगा कि बदलाव क्यों और कब तक चाहिए।
क्या यही एक मात्र रास्ता है?
रीऑर्गेनाइजेशन से कुछ मुश्किलें हल होंगी। मगर, क्या यही एक मात्र रास्ता है। कोई ऐसा हल तलाशें, जिसमें पैसों का खर्च कम हो।
(स्रोत - 'रिऑर्गेनाइजिंग थिंक अगेन' बाय रोन एश्केनास)
ज्यादातर लोग घटना के २४ घंटे के अंदर फीडबैक देने की सलाह देते हैं। जबकि घटना होने और फीडबैक देने के बीच में अंतर कारूरी है। अगर आप घटना को देख-समझकर फीडबैक देंगे तो निश्चित ही आपकी बात का असर ज्यादा होगा। साथ ही लोग इसे बेहतर तरह से समझ सकेंगे। इस दौरान आपको खुद को तैयार करने का समय भी मिल सकेगा। आपको ये भी मालूम होगा कि लोग आपसे किस तरह के फीडबैक की उम्मीद कर रहे हैं। इस दौरान आप घटना के हर पहलू को खुद देख सकेंगे, दूसरों के विचारों को समझ सकेंगे और अपनी बात को अच्छे ढंग से रख सकेंगे। फीडबैक देने से पहले विचार कारूर करें।
(स्रोत- हार्वर्ड बिकानेस रिव्यू 'गाइड टू गिविंग इफेक्टिव फीडबैक')
ऑफिस से दूर रहने वाले बॉस से टीम असंतुष्ट
जिस कंपनी में बॉस टेलीवर्कर की तरह ऑफिस से दूर रहकर काम करता है, उस कंपनी के ज्यादातर एम्प्लाइज असंतुष्ट रहते हैं। एम्प्लाइज को समय-समय पर फीडबैक नहीं मिल पाता है। इससे एम्प्लाइज काम में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। ये जानकारी शोधकर्ता टिमोथी डी. गोल्डन और शोधकर्ता एलन फ्रोमैन ने १,१०० कॉरपोरेट एम्प्लाइज पर किए शोध के आधार पर दी। शोधकार्ताओं का कहना है कि बॉस का लंबे समय तक ऑफिस में न रहने से प्रोडक्टिविटी प्रभावित होती है।
(स्रोत- ह्यूमन रिलेशन्स)
उभरते लीडर्स को बड़े मौकों के लिए तैयार करें
कंपनी में उभरते लीडर्स को बड़ी कि जिम्मेदारियों के लिए तैयार करें। उन्हें क्रॉस फंक्शनल प्रोजेक्ट्स का अनुभव दें। ग्लोबल बिकानेस होने पर इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स की कि जिम्मेदारी भी सौंपे। उनके लीडरशिप स्किल्स को इंप्रूव करें। इन एम्प्लाइज को इंटरप्राइज़ लेवल पर भेजने से पहले एक्जिक्यूटिव प्रोग्राम जैसे ऑर्गेनाइजेशनल डिजाइन, बिकानेस प्रोसेस इंप्रूवमेंट आदि की ट्रेनिंग दें। जब ये लीडर्स बड़ी पोस्ट के लिए तैयार हों तो यूनिट्स संभालने की कि जिम्मेदारी सौंपें। उन्हें काबिल व अनुभवी टीम दें, जिससे नई शुरुआत करने में आसानी हो।
(स्रोत- 'हाउ मैनेजर्स बिकम लीडर्स' बाय माइकल डी. वाटकिन्स)
बॉस के अनुभवों से सीखना चाहिए
संस्थान से जुड़े सभी फैसले खुद लेने वाले बॉस को लगता है कि उसकी टीम कुछ भी नहीं कर रही है। अगर संस्थान की कि जिम्मेदारियों को संभालने में टीम का योगदान नहीं है तो उसकी वजह लीडरशिप स्टाइल में खराबी है। लीडर, टीम के साथ अपने अनुभव बांटे। उन्हें पर्सनल और ऑर्गेनाइजेशनल गोल्स के बारे में बताएं। एहसास कराएं कि इन गोल्स को हासिल करने के लिए टीम का सहयोग कारूरी है। इससे टीम अच्छा परफॉर्म करेगी। बॉस के अच्छे व्यवहार से टीम प्रेरित होती है।
(स्रोत- 'फायर, स्नोबॉल, मास्क, मूवी- हाउ लीडर्स स्पार्क एंड सस्टेन चेंज' बाय पीटर फूडा एंड रिचर्ड हैडहम)
अपनी गलतियों को साफ बता दें
ज्यादातरमैनेजर्स टीम से अपनी गलतियों को छिपाकर अच्छी छवि बनाने की कोशिश करते हैं। या फिर वे महान लीडर होने जैसा बर्ताव करते हैं। बॉस, लीडर, मेंटर या मैनेजर को इससे बचना चाहिए। बॉस के ऐसा करने से टीम पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। लोग आपका असली चेहरा ढूंढने लगेंगे। इसलिए झूठ का सहारा बिलकुल न लें। सच बोलने से आप अपनी टीम का विश्वास जीतेंगे ही, साथ ही टीम बेहतर नतीजे देने का प्रयास भी करेगी। अपनी गलतियों को साफ बता दें।
(स्रोत- 'फायर, स्नोबॉल, मास्क, मूवी- हाउ लीडर्स स्पार्क एंड सस्टेन चेंज' बाय पीटर फूडा एंड रिचर्ड हैडहम)






