अनूठी पहलः स्वागत में गुलाब, दहेज में किताब

अमृतसर. डॉक्टर पिता की डॉक्टर बेटी की शादी और वह भी डॉक्टर से हो तो बारात के स्वागत, खान-पान, मिलनी और विदाई तक दोनों पक्षों के लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं। लेकिन यहां तो एकदम उलटा होगा, न बारात का हुजूम होगा और न ही लाखों का दहेज। बस, बारात के स्वागत में कुछ गुलाब के फूल तथा दहेज में किताब की कुछ प्रतियां रखी जाएंगी। जी हां, यहां के एक डॉक्टर-कम-शायर पिता अपनी बेटी की शादी ऐसे ही कर रहे हैं।
अपने से सुधार की पहल : डॉ. शाम सुंदर दीप्ति सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं। लेखक और शायर डॉक्टर ने दो दर्जन के करीब किताबें लिखीं और इतनी ही संपादित भी की हैं। इन्हीं की बेटी ऋतु की शादी नवांशहर के राहों कस्बे के डॉ. राकेश पाल से 23 फरवरी को होनी है। ऋतु माता कौलां अस्पताल में मेडिकल अफसर हैं। डॉ. दीप्ति कहते हैं कि मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी की शादी में 30 से 35 लाख रु.खर्च हो जाते हैं। लोगों को इसी सोच से बाहर निकालने के लिए ऐसी शुरुआत की।
गिने-चुने मेहमान
बारात में दोनों ही पक्षों के चुनिंदा लोगों को आमंत्रित किया गया है। कार्ड के साथ डॉ. दीप्ति द्वारा लिखी किताब 'एकमिकता का आनंदÓ (सेलिब्रेटिंग टुगेदरनेस) भी भेजी गई है। उनकी पत्नी ऊषा दीप्ति का कहना है कि बारात का स्वागत गुलाब का फूल भेंटकर किया जाएगा। परिवारजन ही सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे। दो घंटे के बाद विदाई और हरेक बाराती को किताब, गुलाब का फूल और वर पक्ष के लोगों को भी किताब दहेज के रूप में दी जाएगी।






