अमृतसर. ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने आज जलियांवाला बाग पहुंच कर भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि दी और इस घटना को ब्रिटिश इतिहास की सबसे शर्मनाक घटना बताया।
जलियांवाला बाग हत्याकांड का आज भी जब जिक्र होता है तो दिल दहल उठता है। निहत्थे किसानों को किस तरह से ब्रिटिश हुकूमत का निवाला बनना पड़ा यह एक अनूठी दास्तान है जो आज भी हमारे रोंगटे खड़ी कर देती है। जलियांवाला बाग में शहीदी कुएं से 120 शहीदों की लाशें निकाली गई थी।
भारत के दौरे पर पहुंचे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भले ही आज जलियांवाला बाग को ब्रिटिस इतिहास की शर्मनाक घटना करार दे रहे हों, लेकिन भारतीय इतिहास की यह एक ऐसी घटना है जिसे आने वाली पीढि़यां कभी नहीं भुला पाएंगी। 94 साल पहले बैसाखी के पावन अवसर पर निहत्थे किसानों को जनरल डायर ने ने गोलियों से उड़वा दिया था।
उधर, कैमरन के दौरे के मद्देनजर अमृतसर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई। सुरक्षा में करीब 4000 पुलिस कर्मी तैनात किए गए है। कैमरन की सुरक्षा-व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी संभाल रही है। इसमें पंजाब पुलिस उसका सहयोग दे रही है। आईजी आरपी मित्तल के नेतृत्व में कई जिलों के पुलिस प्रमुखों और जवानों ने इस दौरान कई प्वाइंटों का जायजा लिया। उनके साथ इंग्लैंड की सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों भी थे। काफिले में 30 से ज्यादा वीआईपी वाहन, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां शामिल थीं।