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एक्वेरियम के उद्घाटन पर लहराएगा काला झंडा

Bhaskar news | Aug 21, 2012, 04:38AM IST
 
 

जालंधर। 22 नवंबर, 2010। चंदन नगर रेलवे अंडरब्रिज को निगम ने मंजूरी दी थी और तब विधायक केडी भंडारी ने कहा था- मेरा सपना पूरा होने जा रहा है। भंडारी दूसरे कार्यकाल में मुख्य संसदीय सचिव हैं लेकिन सपना आज भी अधूरा है। भंडारी को उनके अधूरे सपने की याद दिलाने बीस से ज्यादा कालोनियों के लोग आज उनके घर पहुंचे। ये लोग चेतावनी देकर आए हैं कि 24 अगस्त को जब थ्रीडी फिश एक्वेरियम का उद्घाटन मेयर राकेश राठौर करेंगे, उन्हें काले झंडे दिखाए जाएंगे।


भंडारी के घर पहुंचे तीन दर्जन वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधियों ने कहा, चंदन नगर फाटक 16 घंटे बंद रहता है। इसके दोनों किनारों पर स्कूल हैं। श्री देवी तालाब मंदिर माथा टेकने वाली संगत अलग से ट्रैफिक जाम में फंसी रहती है। अब तक पच्चीस बार विधायक से मिल चुके हैं और हर बार आश्वासन लेकर लौट जाते हैं। मनोरंजन की चीज फिश एक्वेरियम पर ध्यान दिया गया, मगर जो जरूरत है उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। भंडारी के घर राज कुमार शर्मा, संतोख सिंह पायलट, वरिंदर महेंद्रू, गुरमेल सिंह सैनी, जतिंदर चोपड़ा, हरभजन सैनी, अजीत सिंह आदि गए।

प्रोजेक्ट के लिए पैसा जरूर मिलेगा: भंडारी
मुख्य संसदीय सचिव केडी भंडारी ने कहा कि चंदन नगर रेलवे अंडर ब्रिज जरूर बनेगा। इसके लिए पैसा भी मिलेगा। वह पंजाब सरकार से फंड्स लाने की कोशिश कर रहे हैं।

जब पैसा आएगा, ब्रिज बनेगा: राठौर
मेयर राकेश राठौर ने कहा कि चंदन नगर रेलवे अंडर ब्रिज प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार है। इस पर 40 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। पैसा न होने की वजह से प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हुआ। जब पैसा आएगा, काम शुरू होगा। इसके लिए कोशिश हो रही है। फिश एक्वेरियम प्रोजेक्ट बीओटी पर आधारित है, इस वजह से निगम की जेब से कोई कोई पैसा खर्च नहीं होना। इस लिए ये कहना गलत है कि अंडर ब्रिज की बजाए फिश एक्वेरियम पर ही ध्यान है।

2010 में निगम ने दी थी मंजूरी

साल 2008 में पहली बार चंदन नगर रेलवे अंडरब्रिज प्रोजेक्ट को लेकर कवायद शुरू की गई थी। चंदन नगर फाटक फाटक दिन में सौ बार बंद हो जाता है। शहर की एक चौथाई आबादी फाटक से परेशान है। 22 नवंबर 2010 को निगम ने मंजूरी दी थी। इन दिनों पंजाब लोक निर्माण विभाग ने ब्रिज का नक्शा तैयार कर लिया है। रेलवे इसे मंजूरी दे चुका है। अब ब्रिज बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण होना है। जमीन के करीब बीस करोड़ रुपए तथा बीस करोड़ रुपए ब्रिज बनाने पर खर्च होने हैं। नगर निगम इस पैसे का इंतजाम नहीं कर रहा। दो बार विधानसभा चुनाव में ये ब्रिज मुद्दा रहा। एक बार लोकसभा चुनाव में। ताजा नगर निगम चुनाव में भी लोगों ने ब्रिज का मसला उठाया। बाकायदा बैनर लगाकर इसकी जरूरत के बारे में चेताया था।
 
 
 

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