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रेलवे की एक ऐसी लापरवाही जिसने लोगों को लगाया करोड़ों का चूना!

अखंड प्रताप सिंह | Jan 05, 2013, 08:06AM IST
 
 


जालंधर. सर्कुलर टूअर टिकट की बिक्री में रेलवे की लापरवाही के कारण लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगा है। देशभर में हुए इस गड़बड़झाले की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। पता यह भी चला है कि कंप्यूटराइज्ड सर्कुलर टूअर टिकट के लिए ट्रेन नंबर दर्ज करने के बावजूद अधिक किराया वसूला गया। यह किराया लिया गया सुपरफास्ट चार्ज के रूप में। टिकट के साथ सुपरफास्ट चार्ज लगा होने के बावजूद क्लर्क अलग से सुपरफास्ट की टिकट बनाते रहे। ठीक उसी तरह जैसे मैन्युअल सिस्टम में किया जाता था।

जालंधर के लोहा कारोबारी सुदेश भंडारी की जिद के कारण ही इतने खुलासे हो पाए हैं। परंतु अब भी रेलवे के अधिकारी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं। या तो अधिकारी जवाब देने से कन्नी काट काट जाते हैं या फिर इतना भर कह रहे हैं कि जांच की जाएगी।

सुदेश भंडारी के अनुसार रेलवे ने अगस्त महीने में सर्कुलर टूअर टिकट को मैन्युअल की बजाय कंप्यूटराइज्ड करने का आदेश दिया था। परंतु इसके लिए न तो कोई सर्कुलर स्टेशनों पर भेजा गया और न ही कर्मचारियों की ट्रेनिंग करवाई गई। रिजर्वेशन क्लर्क मात्र कंप्यूटर पर दिए निर्देशों के अनुसार टिकट बनाते रहे।
 
लोहा व्यापारी सुदेश भंडारी ने जब अधिक किराया वसूले जाने पर आपत्ति जताई, तो प्रारंभिक जांच हुई। किलोमीटर की गड़बड़ी पाई गई, तो क्लर्को को मौखिक रूप से यह आदेश दे दिए गए कि ट्रेन नंबर दर्ज किए जाएं। ऐसा करने से वह समस्या तो दूर हो गई, लेकिन अब भी साठ रुपए का फर्क आ रहा था। इस पर उन्होंने दोबारा मामले की शिकायत रेलवे बोर्ड और विजिलेंस से की। अब इसकी जांच अभी तक चल रही है। 
 
 

यूं लुटा लोगों का पैसा
 
सुदेश ने बताया कि सीटीटी की कंप्यूटराइजेशन होने के बाद जो सॉफ्टवेयर बना, उसमें गाड़ियों का नंबर डालने के बाद सुपरफास्ट चार्ज खुद-ब-खुद लग जाता है। परंतु यह टिकट पर लिखा नहीं होता। इस जानकारी से अंजान क्लर्को ने सुपरफास्ट के लिए अलग से टिकटें बनानी शुरू कर दीं। जिन यात्रियों को इसकी जानकारी नहीं होती, वे चुपचाप टिकट लेकर चले जाते हैं और जो पूछताछ करते हैं, उन्हें यह कहकर चुप करवा दिया जाता है कि कंप्यूटर में ही ऐसा आ रहा है। शिकायत के बाद अब एक जनवरी से यह आदेश दिए गए हैं कि अलग से सुपरफास्ट चार्ज न लिया जाए।
 
 
 
लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन?
 
करोड़ों के गड़बड़झाले की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। सिटी स्टेशन के अधिकारी और कर्मचारी कहते हैं- गाज तो हमेशा निचले स्तर पर गिरती है। ऊपर के लोग तो बच ही जाते हैं। कर्मचारी तो बस आदेश का पालन करते हैं। सिस्टम कैसा बनना है और नियमों की जानकारी कैसे दी जानी है, यह काम तो उच्च अधिकारियों का है। कर्मचारियों के अनुसार कोई नया सर्कुलर आया नहीं। इसलिए पुराने नियमों के अनुसार टिकट देते रहे। यदि सॉफ्टवेयर टिकट के साथ सुपरफास्ट चार्ज लगा रहा था, तो यह टिकट पर छपना भी चाहिए था।
 
 
 

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