बड़ी कंपनियों ने छीना डिस्ट्रीब्यूटर्स से काम
Source: मनीश कुमार | Last Updated 01:05(05/02/12)
जालंधर. कभी फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन हब माने जाना वाला जालंधर बड़ी कॉपरेरेट कंपनियों के हाथों पिट रहा है। जालंधर में किसी भी बड़ी फिल्म का कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है और डिस्ट्रीब्यूटर बड़ी फिल्म खरीदने में ही असमर्थ हो रहे हैं। ऐसे में भविष्य में यह कारोबार मुश्किलों में पड़ता नजर आ रहा है।
नॉर्थ इंडिया मोशन पिक्चर एसोसिएशन के प्रधान धर्मपाल अरोड़ा बताते हैं कि अब कोई भी बड़ी फिल्म खरीदना डिस्ट्रीब्यूटर के बस की बात नहीं रही। इसका बजट लाखों से करोड़ों में बदल चुका है। इसके चलते बड़ी कंपनियां सीधे ही तीन से पांच फिल्मों का कांट्रेक्ट कर रही हैं। एक फिल्म का ही बजट करीब 5 करोड़ तक पहुंच जाता है। यह डिस्ट्रीब्यूटर के बजट से बाहर की बात है। डिस्ट्रीब्यूटर भी एकत्र होकर इस बजट को पूरा नहीं कर सकते।
पुरानी फिल्मों से ही चला रहे काम
डिस्ट्रीब्यूटर रमेश सभ्रवाल कहते हैं कि वैसे तो वह डिस्ट्रीब्यूटर का काम छोड़ चुके हैं, लेकिन अब भी उनके पास कुछ पुरानी फिल्में बची हैं, जिससे काम चला रहे हैं। वह डिस्ट्रीब्यूशन का काम छोड़ कर रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब भी उन्हें उम्मीद है कि बड़ी कंपनियां अपना हाथ पीछे खींच लेंगी और डिस्ट्रीब्यूटर के दिन वापस आएंगे।
कापरेरेट कंपनी लोगों के शेयर का ही इस्तेमाल कर रही हैं
कापरेरेट कंपनियों ने मार्केट के शेयर की ही राशि फिल्मों पर लगा रखी है। इससे ही प्रिंट खरीदते हैं। फिर चाहे इसमें फिल्म का नुकसान हो या फिल्म को लाभ। इसका कंपनी को कोई भय नहीं होता, क्योंकि पूरा पैसा लोगों का ही लगा होता है।
पंजाबी फिल्मों से जगी है कुछ उम्मीद
पंजाबी फिल्मों से डिस्ट्रीब्यूटर को उम्मीद जगी है। हालांकि ये फिल्में भी मल्टीप्लेक्स में ही चल रही हैं, जो बड़ी कंपनी ही खरीद रही हैं, लेकिन कई अच्छी फिल्में डिस्ट्रीब्यूटर को अच्छा रिस्पांस दे जा रही हैं। भविष्य में भी ऐसी फिल्म बनने से सुधार हो सकता है।
यूएसओ भी बड़ी समस्या
यूनाइटेड सर्विसेस ऑर्गेनाइजेशन से भी डिस्ट्रीब्यूटर्स की स्थिति बदहाल हो गई है। इसमें एक ही प्रिंट मुंबई से चलाया जाता है, जिससे देश भर के सिनेमा हॉल कंट्रोल हो रहे हैं। इसमें कोई प्रिंट नहीं खरीदना पड़ता और यह सीधा मुंबई से टेलीकास्ट होता है। ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर के प्रिंट बिक ही नहीं पाते हैं।