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Home >> Punjab >> Jalandhar >> Engineer Harbhajan Singh Commits Suicide In The Office.

..मेरे पापा को उठाकर आप तुरंत अस्पताल ले जाते तो वे बच जाते!

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सवा सात बजे चले गए थे दफ्तर, बोले-आज काम बहुत है!
 
बेटी कभी मां को ढाढस बंधाती, मां कभी बेटी को। पुलिस सवाल-जवाब कर रही थी। तभी सुरजीत कौर के बोल फूटे- आज सुबह जल्दी उठ गए थे। गीजर में कोई खराबी आ गई थी, तो ठंडे पानी से ही नहा लिया। चाय पी और हल्का नाश्ता लिया। 
मैंने पूछा- आज इतनी जल्द ड्यूटी पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा- हां कुछ गांवों का दौरा करना है। आगे सरकारी छुट्टियां भी आ रही हैं। काम बहुत ज्यादा है।
मुझे पता था, कुछ दिन से वह परेशान हैं। इसलिए सुबह नौ बजे फिर फोन किया। उन्होंने बताया कि दफ्तर में ही हैं। आधा घंटा बाद ही किसी स्टाफ का फोन आया कि साहिब की तबीयत खराब हो गई। बेटा काका एलपीयू गया था। इसलिए पहले बेटी को फोन किया। उसे कहा जल्दी से पापा के पास पहुंचो। इसके बाद बेटे व और जेठ रंजीत सिंह को फोन किया।
 
चाय के साथ लिया जहर!
हरभजन सिंह शुक्रवार को दो घंटे पहले ही दफ्तर पहुंच गए थे। एक कर्मचारी ने बताया कि करीब नौ बजे उन्होंने चाय मंगवाई। आधे घंटे बाद अंदर से ऐसी आवाजें आईं, जैसे वह उल्टी कर रहे हैं। दरवाजा अंदर से बंद था। कांच तोड़ कुंडी खोली, तो हरभजन सिंह जमीन पर पड़े थे। पास ही चाय का कप उलटा पड़ा था। कमरे से सल्फास की दरुगध आ रही थी। इससे शक यह भी जताया जा रहा है कि संभवत: हरभजन सिंह ने सल्फास निगलने के लिए ही चाय मंगवाई होगी। कर्मचारी के अनुसार कमरे की स्थिति देखकर सीनियर अधिकारी वहां से खिसक गए। इसी बीच किसी ने उनकी पत्नी को इत्तला दी। साढ़े नौ से दस बजे तक हरभजन यूं ही पड़े रहे।
 

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