मेरी मौत के कारण डीडीपीओ, बीडीपीओ और एसडीओ
अपने ही दफ्तर में बेगाने हो गए हरभजन सिंह को शायद यह अंदेशा पहले से था कि मौत के बाद भी कोई ‘खेल’ जा सकता है। इसलिए उन्होंने अपनी सारी दास्तां सुसाइड नोट में लिख डाली। इसके बाद दीवार पर लाल रंग के मार्कर से दीवार पर सुसाइड नोट लिखा। सबसे ऊपर यह लिखा कि सुसाइड नोट उनकी जेब में है। ताकि यदि कोई चाहे भी, तो भी सुसाइड नोट गायब न कर सके। पंजाबी में लिखे सुसाइड नोट में डीडीपीओ सरबजीत सिंह वालिया, बीडीपीओ भगवान सिंह और एसडीओ नवदीप सिंह पर कई आरोप लगाए हैं।
आरोप-1 : गांव संगरावाली ब्लॉक भोगपुर की पंचायत ने ऊंची-नीची पंचायती जमीन की मिट्टी उठाने के आरोप में आठ लोगों पर केस दर्ज करवाया। इसमें मेरा नाम भी गलत तरीके से जोड़ा गया।
आरोप-2 : विक्रम बंगड़ पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत धीना के खिलाफ शिकायत की जांच नवदीप सिंह गिल एसडीओ पंचायती राज की ओर से करवाई गई। अधिकारियों ने मिल कर पूर्व सरपंच की ओर से गांव धीना में किए गए कामकाज की मौके पर गिनती नहीं करवाई और झूठी असेस्मेंट रिपोर्ट तैयार कर सरपंच के खिलाफ भारी रकम की असेस्मेंट की गई। इसमें मुझे भी जिम्मेदार ठहराने की धमकी दी जा रही है।
आरोप-3 : अधिकारियों ने ब्लैकमेल कर दो लाख रुपए की रकम ली है, जोकि मैंने दिनांक 16 जनवरी, 2013 को ओबीसी बैंक जीटी रोड जालंधर के खाता नंबर 00342010035050 से निकलवा कर दी है। इन अफसरों की ओर से मुझसे और रकम मांगी जा रही है जो मैं देने में असमर्थ हूं।
आरोप-4 : भगवान सिंह की ओर से गांव मरोवाल में करवाए गए काम की गलत असेस्मेंट मनजीत सिंह एई की ओर से तैयार करवाकर पत्र उच्च अधिकारियों को भेजे जा रहे हैं। इस काम से उसका कोई संबंध नहीं है। ग्राम पंचायत चाचोवाल की ग्रांट के इस्तेमाल के प्रमाण पत्रों पर मेरे हस्ताक्षर फर्जी किए गए हैं और कुछ इस्तेमाल प्रमाण पत्र जिनका कोई रिकार्ड नहीं है और न ही ग्रांट जारी हुई है, झूठे बनाए गए हैं। मुझे ब्लैकमेल किया जा रहा है।
मैं कोई घोटाला नहीं कीता, मैनूं माफ कर दो
मनीश कुमार. मैं कोई घोटाला नहीं कीता, मैनूं माफ कर दो.. । यह दर्द भरी आवाज न्यू गुरु नानकपुरा के मकान नंबर 103 से आती है। घर में बीडीपीओ ईस्ट-1 ब्लॉक में तैनात ग्राम विकास अधिकारी जगजीत सिंह रहते हैं। वह भी बीडीपीओ से परेशान हैं। बीती सत्रह तारीख को अचानक दफ्तर से घर लौट आए। तब से छुट्टी पर हैं। दफ्तर में ऑडिट टीम के आने के बाद ऐसा हुआ। मानसिक रोग के शिकार हो गए हैं। चुप बैठे रहते हैं। कभी अचानक चीख पड़ते हैं- मैंने गलत काम नहीं किया, माफ कर दो, ऑफिसर जो मुझे कहते थे, वही किया।
जगजीत सिंह की हालत इतनी बुरी हो चुकी है कि ग्यारह साल की बेटी को भी नहीं पहचान पाते। मौसेरा भाई राजेश पटियाला से आया हुआ है। राजेश ने बताया- जगजीत सिंह को ग्राम पंचायत के साथ अकाउंट्स का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था। जबरदस्ती काम करवाया जा रहा था। इसी कारण वे मानसिक रोग का शिकार हुए।
मन में डर बैठ चुका है : जगजीत सिंह का इलाज कर रहे डॉ. अशोक गुप्ता बताते हैं कि उनके दिमाग में डर बैठ चुका है। वह एक्यूट स्ट्रेस रिएक्शन विद डिप्रेशन से ग्रस्त हैं।
नकोदर रोड पर नारी निकेतन के पास ही आबादपुरा की गली नं. पांच में शुक्रवार सुबह हलचल मच गई। पंचायत समिति में पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर हरभजन सिंह ने एक सुसाइड नोट अपनी जेब में रखा। दूसरा दीवार पर लिखा। चाय मंगवाई। कमरा बंद किया। थोड़ी देर बाद उन्हें उल्टियां करते सुना गया। दरवाजा तोड़ा तो वे फर्श पर तड़प रहे थे। उस समय साढ़े नौ बज रहे थे। घर फोन किया गया। साढ़े दस बजे एंबुलेंस से पास के अस्पताल ले गए। देर हो चुकी थी। बचाने को कुछ नहीं बचा था। बेटी को सबसे बड़ी शिकायत ये थी कि पापा को किसी ने तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचाया। हरभजन सिंह ने सुसाइड नोट में तीन अफसरों को मौत का कारण माना है। उनके खिलाफ रपट दर्ज हो गई है। तीनों फरार हैं। इन्हीं में से एक अफसर के खिलाफ कुछ दिन पहले इसी दफ्तर के जगजीत सिंह ने एसडीएम को खुदकुशी की धमकी दी थी..