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जन्म से हाथ नहीं, लेकिन हौसलों की उड़ान ऐसी कि सबको पीछा छोड़ा

 
Source: निशान सिंह चाहल   |   Last Updated 09:22(09/02/12)
 
 
 
 


लुधियाना/काहनूवान. इंसान में कुछ कर गुजरने की जज्बा हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। इस बात को साबित कर दिखाया है जिला गुरदासपुर के गांव सेखवां निवासी साधू सिंह ने। जन्म से दोनों हाथों से विकलांग होने के बावजूद साधू सिंह ने कभी निराशा को हावी नहीं होने दिया और हमेशा अपने दिल की सुनते हुए कई कामयाबी हासिल की। 

 

 

साधू सिंह ने हाथ न होने पर भी पैरों से ही लिखाई करते हुए बाहरवीं तक पढ़ाई की और अच्छे अंकों में परीक्षा भी उत्तीर्ण की। साधू सिंह के मुताबिक उसने छह साल पहले बारहवीं पास की थी। बारहवीं के बाद साधू के पिता मंजीत सिंह ने कई बार शिक्षा मंत्री सेवा सिंह सेखवां के पास किसी सरकारी स्कूल या कार्यालय में तरस के आधार नौकरी देने की अपील की लेकिन उन्हें आश्वासनों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा।

 

परिवार पर भी बोझ नहीं

 

नौकरी न मिलने पर भी साधू ने अपने को परिवार पर बोझ नहीं बनने दिया। वह रोजी-रोटी के लिए जागरण करते हैं और सभ्याचारक मेलों में पैरों से माइक पकड़कर गाते हैं। वह साबर कोटी, दुर्गा रंगीला, जैली व फिरोज खान जैसे कलाकारों के साथ मंच सांझा कर चुके हैं। भले ही उक्त पंजाबी गायकों की ओर से मंच पर साधू की बुलंद आवाज और कला की प्रशंसा की गई है, लेकिन वह साधू को गायकी के लिए और रियाज करने की बात कहकर पल्ला झाड़ गए हैं। साधू आगे पढ़ना चाहते हैं।
 
उसे पहले मिट्टी के तेल से भीगे कपड़े पहनाये गए फिर..

1016 साल का कमाल, यह बौद्ध मठ कर रहा 'चमत्कार'! 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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