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'तकनीक के माहिर और संस्कृति के पुजारी हैं जापानी'

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जालंधर। जापान के लोग हम जैसे ही हैं, परिवार में रहने और पारिवारिक रिश्तों की कीमत समझने वाले। मातृभाषा से इतना प्रेम करते हैं कि अंग्रेजी को अपना तो लिया, लेकिन घर में, अपनों के बीच आज भी जापानी में ही बात करते हैं। पर समय की कीमत बखूबी समझते हैं। समय से आगे और नियमों के अनुसार चलना उनकी फितरत है। दस दिन जापान में बिताने के बाद शहर वापस लौटी अदिति शर्मा के मन में यह तस्वीर बनी है जापान की। एपीजे स्कूल रामामंडी में बारहवीं कामर्स स्ट्रीम की छात्रा है अदिति शर्मा। मां मधु शर्मा यहीं प्रिंसिपल हैं और पिता सुभाष शर्मा बिजनेसमैन हैं।
 
अदिति के अनुसार 26 नवंबर को 25 विद्यार्थियों के ग्रुप के साथ जापान पहुंची थी। कोआर्डिनेटर युवतियों कोगासान, किमीसान ने हायोगोजैयामस (वेलकम) कहकर उनका स्वागत किया। टोक्यो सिटी के होटल की 47वीं मंजिल पर ठहरे। यहां से इकाराकी शहर गए, जहां छह माह पहले भूकंप से बड़ी तबाही हुई थी। पर यहां विकास की गति इतनी तेज है कि दिनचर्या पुराने ढर्रे पर लौट चुकी है। कहीं-कहीं तबाही के निशान ही बाकी हैं। सबने मिलजुलकर मुकाबला किया इस त्रासदी का। एक जापानी परिवार के साथ समय बिताने का अवसर भी मिला। इस परिवार की मां युकारी, यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की टीचर हैं। उन्होंने हर स्थिति में मन शांत रखने के टिप्स दिए। उन्हें हमने बिंदिया, चूड़ियां और तोरन बतौर तोहफा दिया, जो उन्हें बेहद पसंद आया। वह तो सारा दिन बिंदिया लगाए रखती थीं। उन्हें भारतीय संस्कृति पर बनी पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन भी बेहद भाई।
 
हर नियम मानते हैं
 
बकौल अदिति जापानी लोग हर नियम मानते हैं। सिस्टम से चलते हैं। शहर बेतरतीब नहीं और न ही ट्रैफिक व्यवस्था। जेब्रा क्रासिंग से पीछे ही वाहन खड़े होते हैं। कोई आगे हो जाए, तो बगल वाला टोक देता है। पर कोई बुरा नहीं मानता और न ही झगड़ा करता है।
 
हर पल विषय को लेकर अपडेट रहते हैं शिक्षक
 
अदिति के अनुसार वह अपने समूह के साथ टागा हाई स्कूल गई। यहां जापानी विद्यार्थियों और शिक्षकों से वार्तालाप हुई। सबके पास लैपटॉप है। हर शिक्षक अपने विषय से अपडेट होता रहता है। सभी के पास अपने विषय की प्रेजेंटेशन है। शिक्षक लेक्चर देने के बाद बच्चों से सवाल पूछते हैं। यह डराने के लिए नहीं होता, बल्कि उनका कन्फ्यूजन दूर करने के लिए होता है। इससे पहले ही प्रेजेंटेशन दिखा दी जाती है, जिससे विषय की समझ विकसित हो चुकी होती है।
 

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