शादी करने के बाद दोनों नवदंपति लुकछिप कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। इतने में लड़की के पिता जसपाल सिंह को सूचना मिली कि नवदंपति अपने चाचा धर्मपाल के घर आया हुआ है। इस पर इन्होंने 11 अगस्त सुबह से ही लड़के के चाचा के घर के बाहर डेरा लगा लिया। सुबह करीब साढ़े 9 बजे जब गुरप्रीत चाचा के साथ घर से निकले तो सफारी गाड़ी में उनका इंतजार कर रहे लड़की के परिजनों ने बटाला से अमृतसर जाते समय उस पर गोलियों की बौछार कर दी। इस पर एक गोली दीवार पर लग गई, जिससे चाचा और भतीजा भाग निकले।
लड़की वालों ने गुरप्रीत का पीछा किया और धान के खेतों में घेर लिया। इस पर ससुराली पक्ष के ससुर मंजीत सिंह और उसके भाई जसपाल सिंह दोनों पुत्र सुरैण सिंह ने उस पर तीन गोलियां चलाईं, जो गुरप्रीत की छाती, बाजू और टांग पर लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
चाचा धर्म सिंह के बयानों पर थाना सदर बटाला पुलिस ने 11 अगस्त 2009 को धारा 302, 148, 149, 120 बी और आर्म एक्ट में मामला दर्ज किया था। एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरवीन भारद्वाज की अदालत ने मंजीत सिंह तथा जसपाल सिंह को 20 साल की कैद तथा 5 हजार रुपए जुर्माना और आर्म एक्ट के तहत पांच साल की कैद की सजा सुनाई है।
दूर का रिश्तेदार होने से शादी से खफा थे
लड़की और लड़का पक्ष की आपस में दूर की रिश्तेदारी भी थी, जिसके चलते लड़की पक्ष वालों ने इस शादी का विरोध किया था। इससे दोनों परिवारों में पहले भी कई बार आपसी नोक-झोंक हुई थी। लड़की के परिवार वालों ने पहले भी कई बार गुरप्रीत सिंह को जान से मारने की धमकी दी थी।