लुधियाना। मंगलवार शाम को शान-ए-पंजाब के इलेक्ट्रॉनिक इंजन में अचानक आग गई। आग इंजन के ऊपरी भाग में ट्रायल के तौर पर लगाए गए नए उपकरण डीबीआर में लगी थी। समय रहते पता चलने पर किए गए बचाव कार्य से शान-ए-पंजाब बर्निग ट्रेन बनने से बच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्लेटफॉर्म पर ट्रैक से कुछ ही दूरी पर होजरी के सैकड़ों नग पड़े थे, जबकि इंजन के ठीक बाद जनरल कोच था। अगर 10 मिनट की देरी और हो जाती तो कोई बड़ा हादसा हो जाता।
हादसे के कारण ट्रेन 1 घंटा लेट हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया जब ट्रेन प्लेटफार्म पर प्रवेश कर रही थी तो आग का पता चला। इंजन के ऊपरी भाग से निकल रही आग को देखकर प्लेटफार्म पर मौजूद यात्रियों, माल ढोने वाली लेबर व बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
जैसे ही ड्राइवर को पता लगा तो उसने ओएचई से बिजली सप्लाई लेने वाला पैंटो ग्राफ गिरा दिया और धीरे-धीरे ट्रेन को ब्रेक लगा दी।
सूचना मिलते ही स्टेशन मास्टर आरके शर्मा, डीटीएम पलविंदर सिंह, डीई एमके गोयल, इंस्पेक्टर यशवंत सिंह, इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह मौके पर पहुंच गए।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मौके पर पहुंच गई। लेकिन प्लेटफॉर्म पर पड़े नगों की वजह से परेशानी आई। कर्मियों ने 18 मिनट में आग पर काबू पा लिया। इसके बाद इंजन को इलेक्ट्रिक शेड भेज दिया गया। दूसरी पावर लगाकर ट्रेन को दिल्ली के लिए रवाना किया।
क्या है डीबीआर
डायनामिक ब्रेक रजिस्टेंट (डीबीआर) नया उपकरण है। यह उपकरण सप्लाई होने वाली बिजली को उस समय कंट्रोल करता है, जब ड्राइवर ब्रेक लगाता है। इस सिस्टम से ट्रेन के पहिए कम घिसते हैं। यह उपकरण सीधे तौर पर ट्रेन को रोकने में सहायता करता है। इससे आग लगने की संभावना कम होती है। अक्सर यह उपकरण गर्म होकर लाल हो जाता है। डीई एमके गोयल के मुताबिक डीबीआर के लाल होने पर लोगों ने इसे आग समझ कर शोर मचाया। उपकरण जल गया , लेकिन लोको का नुकसान नहीं हुआ।
रिपोर्ट बनाई जाएगी
> आग लगने से इंजन कुछ क्षतिग्रस्त हुआ है। लेकिन किसी भी यात्री को नुकसान नहीं हुआ। घटना की जानकारी रेलवे के उच्चाधिकारी को दी गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेष अधिकारी की ड्यूटी लगाई गई है।ञ्जञ्ज
-पलविंद्र सिंह, डीटीएम
बैरिकेड बने परेशानी
> रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट पर लगे बैरिकेड और जीआरपी थाने के निकट लगे गेट की वजह से फायर ब्रिगेड को मुश्किल आई। फिर जब माल गोदाम से अंदर आए तो बेढंग तरीके से खड़े माल से लदे वाहनों और रेलवे की ओर से कहीं भी फायर हेड न होने से मुश्किलें और बढ़ गईं।
-भूपिंद्र सिंह सिद्धू, डिवीजनल फायर अधिकारी