यात्रा के दौरान अमनदीप मंगलवार को साइकिल से लुधियाना पहुंचे। अमनदीप सिंह बेंगलुरू में गुरुद्बारा गुरुनानक मिशन में पंजाबी अध्यापक थे। अपने गांव में छोटे बच्चों को बीड़ी-सिगरेट पीते देख उनमें नशे के विरुद्ध बच्चों को जागरूक करने की तमन्ना पैदा हुई।
अमनदीप सिंह 1 जनवरी 2008 को साइकिल पर बच्चों को जागरूक करने निकल पड़े। अब तक वह 1 लाख 25 हजार किलोमीटर का सफर तय कर 24 राज्य घूम चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह हिंदू परिवार से संबंध रखते हैं। नाम महादेव रेड्डी था। 35 साल पहले गुरुद्वारा साहिब में पंजाबी की शिक्षा ग्रहण करने के दौरान सिख धर्म अपना लिया।
साइकिल पर है लेपटॉप व इंटरनेट की सुविधा
खाना-पीना बनाने के सामान के अलावा अमनदीप सिंह साइकिल पर ही लेपटॉप और इंटरनेट की सुविधा लेकर घूम रहे हैं। इंटरनेट के जरिए वह अपने परिवार से बातें करते हैं।
बेटी की शादी में भी छूटी
अमनदीप को बेंगलुरू से निकले पूरे चार साल हो चुके हैं। उनके अनुसार पिछले साल जून माह में उनकी बेटी मनप्रीत की शादी अमृतसर के लड़के के साथ हुई, लेकिन इस मुहिम के कारण वह अपनी बेटी की शादी में शामिल नहीं हो सके।
जेब से खर्चे 70 हजार
लोगों को जागरूक करने निकले अमनदीप ने अब तक खाने-पीने के खर्चे के अलावा 4 साइकिलों, 13 टायरों व आठ ट्यूबों पर 70 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं।