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प्रत्याशियों को रद्द न करें तो और क्या करें!

 
Source: इन्द्रप्रीत सिंह   |   Last Updated 02:15(05/02/12)
 
 
 
 
नाभा. ‘32 साल में ये हमें सड़क, पीने का पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दे सके। ये सुविधाएं देना तो दूर, अभी तक हमारे विधायक और सांसद यह तय नहीं कर पाए कि हमारा इलाका नाभा शहर में है या किसी गांव में। यह कहना है एकता कॉलोनी के मोहम्मद सलीम का, जिन्होंने पहली बार सरेआम खड़े होकर नाभा के बूथ नंबर 137 में सभी उम्मीदवारों को रद्द कर दिया।’

‘हमारी नौ कॉलोनियों की आठ हजार से ज्यादा वोट हैं लेकिन एक प्राइमरी स्कूल तक नहीं है। सिर्फ वोटों के दौरान ये नेता हमें दिखाई देते हैं लेकिन पूरे पांच साल इन्होंने कभी फरियाद सुनी है। मैं यूपी से 25 साल पहले यहां आकर बसा था। कितनी बार दफ्तरों में धक्के खा चुके हैं कि हमें पीने का पानी मुहैया कराया जाए, हर बार कह देते हैं कि आपका इलाका नगर पालिका के अधीन नहीं आता।

नप में नहीं आता तो वोट मांगने क्यों आते हैं ये?’ यह पूछना है 52 वर्षीय इसलाम खां का जो संत नगर का वासी है। ये इक्का-दुक्का लोग नहीं, बल्कि इन जैसे 388 लोगों ने इस बार सभी उम्मीदवारों को विधानसभा के चुनाव में रद्द कर दिया। हालांकि इनमें से कइयों को डराया और धमकाया भी गया।

एक महिला पत्रकार ने जब इसका विरोध किया तो उसे थप्पड़ मारे गए। इससे उसे बाएं कान से सुनना कम हो गया है। जमीन पर गिरा दिया, यह भी नहीं देखा कि वह गर्भवती है। इस झगड़े से डरकर जानिब अंसारी वोट डालने ही नहीं गया। वह बताता है, मुझे कहा गया, उम्मीदवारों को रद्द किया तो उसके घर का मीटर उतरवा लिया जाएगा। वह पूछता है, आखिर हम क्या करें? हम पिछले 32 सालों से न किसी गांव की पंचायत के अधीन हैं और न ही शहर की नगर पालिका के अधीन।

हमलावरों पर हो सख्त कार्रवाई : गर्ग

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंसेस के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. पीएल गर्ग के मुताबिक रिफ्यूज टू वोट के कानूनी अधिकार के इस्तेमाल के खिलाफ पोलिंग स्टाफ, कांग्रेस पार्टी के वर्कर और सुरक्षाकर्मियों का गठजोड़ ही नाभा में पंजाबी अखबार की पत्रकार हरविंदर कौर पर हमले का कारण बना। किसान भवन, सेक्टर 35 में पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. गर्ग ने कहा कि इस घटनाक्रम के तथ्यों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी।

इस कमेटी ने जांच में पाया कि पोलिंग स्टाफ नौ कालोनियों के वोटरों की तरफ से रिफ्यूज टू वोट अधिकार का इस्तेमाल करने के खिलाफ थे। इन लोगों को किसी न किसी उम्मीदवार को वोट डालने के लिए जोर डाला गया। चार पत्रकारों ने भी पोलिंग स्टाफ को इस अधिकार के बारे में बताया। इसके बावजूद पोलिंग स्टाफ रिफ्यूज टू वोट के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं हुआ। वहां तैनात स्टाफ ने लोगों से गाली गलौच की और कथित आरोपी सुरिंदर सिंह के बेटे यादविंदर ने हरविंदर कौर के साथ मारपीट की। आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

‘मजबूरी है’

कॉलोनियों की गलियों में गंदा पानी जमा है। वजह पूछने पर अजायब कॉलोनी के एक किराये के मकान में रहने वाली शीला देवी बताती हैं, घर के पानी की कोई निकासी नहीं है इसलिए कच्ची गलियों में ही हम पानी निकाल देते हैं। यह सभी घरों ने कर रखा है।

क्या कहते हैं विधायक

इन कॉलोनियों को शहर में लेने का मुद्दा कई बार सरकार के पास भेजा गया है। मैंने खुद यहां सड़कें बनवाने की कोशिश भी शुरू की थी लेकिन सरकार बदलने के बाद सारा काम रुक गया। पिछले पांच सालों यहां आबादी और बढ़ गई है निश्चित तौर पर इनकी मांगें हमें पूरी करनी होंगी।

रणदीप सिंह नाभा, विधायक


क्या कहती हैं एसडीएम

नगरपालिका की सीमा बढ़ाने का मामला सरकार के पास लंबित है। इसलिए जब तक यह सीमा नहीं बढ़ती, ये कॉलोनियां नगर पालिका के अधीन नहीं आ सकतीं। और यह केवल नाभा का मामला नहीं है बल्कि पंजाब की कई अन्य नगर पालिकाओं की कॉलोनियों के साथ ऐसा हो रहा है।

पूनम दीप कौर, एसडीएम नाभा
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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