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डीएसपी हत्याकांडः जींस पहना हत्यारे ढूंढ रही पुलिस

 
Source: राजन कैंथ   |   Last Updated 05:42(10/02/12)
 
 
 
 
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लुधियाना. हाई प्रोफाइल डीएसपी डबल मर्डर ब्लाइंड मिस्ट्री को वीरवार को एक सप्ताह पूरा हो गया। डीएसपी बलराज सिंह गिल तथा महिला की हत्या प्रकरण में पुलिस अभी भी अंधेरे में तीर चला रही है। कोई ठोस सबूत नहीं होने के कारण सर्च आपरेशन के नाम पर गांव के मजदूर युवकों को उठा रही है। जिससे घटना स्थल के आस पास सटे गांव में दहशत का माहौल है।

पुलिस के होलसेल में संदिग्ध लोगों को उठाने की सच्चाई का तब पता चला, जब पुलिस द्वारा छोड़े गए कुछ युवकों से बात की गई। कुछ युवकों ने बताया कि पुलिस पूछताछ के साथ उन्हें दो पेंट भी पहना कर चेक कर रही थी। बताया जा रहा है कि बरामद कारों से दो जींस मिलीं थी। पुलिस का मानना है ये जींस हत्यारों में से किसी एक की रही होंगी। जिसे वह कार में छोड़ गए।

गांव बल्लोके, बारणहारा, तलवाड़ा, प्रताप सिंह वाला तथा नूर पुर बेट के संदिग्ध लोगों को राउंड अप किया था। उनमें से कई लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। गांव बारणहारा के दो मजदूर युवकों ने बताया कि मंगलवार तड़के पुलिस ने उन्हें घर से उठा लिया। जीप में बैठा कर सीआईए स्टाफ के आफिस ले गए। वहां उनसे दो दिन तक कड़ी पूछताछ की गई। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या वह नशा करते हैं। युवकों के इनकार करने पर मेडिकल कराने का धमकी भी दिया गया। मगर अंत वीरवार सुबह उन्हें छोड़ दिया गया।

पुलिस बताए कैसे चली 730 किलोमीटर कार

हत्याकांड में कोई सुराग नहीं मिलने से डीएसपी बलराज गिल के मामा मिनिस्ट्री आफ फर्टीलाइजर एंड एग्रीकल्चर के फॉर्मर डायरेक्टर शाम सिंह हरीका पुलिस कार्रवाई से बेहद निराश हैं। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल कारों को बरामद करके पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है।

पुलिस कैसे कह सकती है कि बरामद की गई कार 730 किलोमीटर चली। आज के दौर में ऐसे कितने लोग हैं, जो घर से कार की मीटर की रीडिंग देख कर निकलते हैं। दोनों कारों का एक ही दिन गायब हो जाना तथा एक साथ एक ही रात में बरामद होना साबित करता है कि इस पूरे नेटवर्क को कोई एक ही आदमी कमांड कर रहा है। यह कांट्रेक्ट किलर भी हो सकता है।

रीमा हत्याकांड सुलझाने वाले अधिकारी टीम में शामिल

बहुचर्चित रहे रीमा जैन हत्याकांड में भी लुधियाना पुलिस कुछ इसी प्रकार से उलझ गई थी। अंत में महकमें के कुछ धुरंधर और तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को सुलझा कर विभाग की नाक बचाई थी। बताया जा रहा है कि इस दोहरे हत्याकांड को सुलझाने के लिए अब उन्हीं पुलिस अधिकारियों को टीम में शामिल किया गया है।

हालांकि पुलिस ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। यह लोग पुलिस की इंटरनल कार्रवाई में फिलहाल पूरी तरह से शामिल नहीं हैं। मगर इन एक्सपर्ट लोगों की गाइडलाइन के तहत तफ्तीश का काम नए सिरे से शुरू किया जा रहा है। इनमें से एक अधिकारी इंटेलीजेंसी तथा दूसरा मोगा जिले में तैनात है।

एक दर्जन लोगों को लिया हिरासत में

डीएसपी बलराज गिल और मोनिका कपिला हत्याकांड में पुलिस अब तक 100 से अधिक लोगों को हिरासत में ले चुकी है। उनमें से अधिकतर को पूछताछ के बाद छोड़ा जा चुका है। मगर अभी भी पांच दर्जन से अधिक लोग एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम) की हिरासत में है। वीरवार भी पुलिस ने शहर के अलग अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई के दौरान एक दर्जन के करीब लोगों को हिरासत में लिया। मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस उन लोगों पर भी नजर रख रही है, जिन पर पुलिस को संदेह है कि कहीं न कहीं वह भी कांट्रेक्ट किलिंग के मामले में संलिप्त रह चुके हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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