Home » Punjab » Ludhiana » Illegal Constructions Created In Ludhiana

दो साल पहले कार्रवाई, सांठगांठ से कोठियां बनाईं

यशपाल शर्मा/महाबीर सेठ | May 07, 2013, 06:02AM IST
दो साल पहले कार्रवाई, सांठगांठ से कोठियां बनाईं

लुधियाना. नगर निगम की सीमा में पिछले दो सालों में बनी अवैध कॉलोनियों से निगम को करोड़ों रुपए का चूना लग चुका है। इसमें नगर निगम की बिल्डिंग शाखा की मिलीभगत सीधे-सीधे दिखाई दे रही है। डेढ़ दर्जन के करीब इन कॉलोनियों में  निगम की ओर से दो साल पहले सड़कें, सीवरेज लाइनें व चारदीवारी को तोड़ा था। लेकिन बाद में इन्हीं अधिकारियों की मिलीभगत से ये कॉलोनियां आबाद हो गई। इन कॉलोनियों के एवज में बिल्डिंग अधिकारियों की जेब में तो लाखों रुपए आए, लेकिन निगम के खजाने खाली रह गए। बाद में मिलीभगत से बिना नक्शे के अवैध मकानों का निर्माण भी करवा दिया गया।


दस करोड़ से अधिक का चूना


निगम किसी भी कॉलोनी को रेगुलर करने को अलग-अलग पॉलिसी के तहत 35 लाख से 50 लाख तक की फीस (डेवलपमेंट चार्ज, सीएलयू फीस सहित) प्रति एकड़ ले सकता है। लेकिन ये फीस बिल्डिंग अधिकारियों की मिलीभगत से निगम के खाते में नहीं आई। एक अनुमान मुताबिक इन कालोनियों के एवज में निगम को करीब दस करोड़ से अधिक का चूना लगा दिया गया है।


यहां बनी हैं अवैध कॉलोनियां
निगम डी जोन की टीम ने हैबोवाल, जस्सियां रोड, लक्ष्मी नगर, चंद्र नगर रेलवे लाइन के साथ तत्कालीन एटीपी एसएस बिंद्रा की ओर से करीब आधा दर्जन कॉलोनियों पर कार्रवाई की थी। इन कॉलोनियों की सीवरेज लेन व सड़कें तोड़ी थी। इसके बाद बिल्डिंग शाखा से हुई सेटिंग के बाद ये कॉलोनियां भी तैयार की गई। ऐसे ही हाल बी जोन के तहत आती काराबारा रोड व बस्ती जोधेवाल रोड पर भी हैं। यहां भी दो साल पहले तत्कालीन एटीपी हरप्रीत घई की अगुवाई में कॉलोनियों पर कार्रवाई की गई। इसके एवज में एक आध कॉलोनी को छोड़ किसी भी कॉलोनी से निगम को सीएलयू व डेवलेपमेंट चार्ज तो हासिल नहीं हुआ, लेकिन यहां बिना नक्शे के मकान जरूर बन रहे हैं।


ऑफिसर पर लुटा दिए 81000 रुपए


लुधियाना. जिला रेड क्रॉस सोसायटी में स्मॉल सेविंग डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर एके शर्मा को एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी का अतिरिक्त कार्यभार क्या सौंपा गया, एकाउंटेंट ने उन्हें एक साल में 81,000 रुपए दे दिए। जबकि एके शर्मा को जिला रेडक्रॉस सोसायटी की तरफ से कोई वेतन नहीं दिया जाना था। क्योंकि शर्मा खुद डिप्टी डायरेक्टर के पद का वेतन सरकार से ले रहे थे।


एके शर्मा को 15 फरवरी 2007 में सोसायटी के एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा। कार्यभार संभालने के एक साल तक एके शर्मा ने अतिरिक्त वेतन के लिए कोई आवेदन नहीं किया। बावजूद इसके एकाउंटेंट रहे चंद्रमोहन ने डीसी को 4 फरवरी 2008 को एक दफ्तरी नोट भेजा, इसमें कहा गया कि एके शर्मा का कामकाज बढिय़ा है, इसलिए उन्हें ऑनरेरी सैलरी के रूप में 6000 रुपए प्रति महीना दिया जाए।
 


जूनियर ने की सीनियर की दोबारा सिफारिश
चंद्रमोहन ने अपने सीनियर एके शर्मा की ऑनरेरी सैलरी की सिफारिश दोबारा 29 फरवरी 2008 को डीसी से की। इस बार डीसी ने इसे पास कर दिया और 13 मार्च 2008 को 39,000 रुपए का पहला चेक जबकि 42,000 का दूसरा चेक 2 अप्रैल 2008 को जारी कर दिया।


उड़ीसा रिलीफ फंड में हेराफेरी की एडीसी को सौंपी जांच
उड़ीसा रिलीफ फंड के 11 लाख रुपए की हेराफेरी करने व लुंगी-साड़ी घोटाले की जांच एडीसी (डी) ऋषिपाल को सौंपी गई। दैनिक भास्कर में जिला रेड क्रॉस सोसायटी में घपलेबाजी की खबर प्रकाशित होते ही डीसी कम सोसायटी के प्रधान राहुल तिवारी ने एडीसी (डी) ऋषिपाल को जांच सौंप दी है। एडीसी (डी) ऋषिपाल ने कहा कि रिकॉर्ड तलब किया है। उन्होंने माना कि रिकॉर्ड की प्राथमिक जांच में 11 लाख से ज्यादा की रकम खर्च दिखाई गई, लेकिन इसका एप्रूवल किसी से नहीं लिया गया है।

आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
6 + 6

 
विज्ञापन
 
Ethical voting

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

स्पोर्ट्स

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment