जेल में कैदियों को सुधारने का भाई साब ने ढूंढ निकाला अनोखा फंडा
Source: कुलवंत सिंह | Last Updated 06:12(06/02/12)
पटियाला. पटियाला जेल का नजारा आजकल कुछ बदला-बदला सा है। कैदी रोजाना ढोल की थाप पर जहां जमकर नाच रहे हैं वहीं खेलों में भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। कैदियों की ये बदली-बदली सी गतिविधियां जेल प्रशासन द्वारा इन्हें सुधारने के लिए शुरू किए गए नए प्रोजेक्ट का कमाल है।
इसके लिए उन्हें कोई मजबूर नहीं कर रहा बल्कि इनके कदम खुद-ब-खुद ढोल की थाप पर थिरक नेलगते हैं। जेल में बंद रहने से जहां कैदी तनाव में आ जाते हैं, लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते हैं, नशाखोरी बढ़ा देते हैं वहीं आत्महत्या करने से भी पीछे नहीं हटते। बस! इन सबसे इनका ध्यान बंटाने के लिए ही जेल प्रशासन ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके सकारात्मक नतीजे भी मिलने शुरू हो गए हैं।
जेल अधिकारी भी खुश
कैदियों के बदले-बदले व्यवहार से जेल अधिकारी भी काफी खुश हैं। उनका कहना है कि जब ढोल बजता है तो कैदी तब तक नाचते रहते हैं जब तक थक न जाएं। फिर इसके बाद गहरी नींद सो जाते हैं। इससे न केवल इनका तनाव दूर होगा बल्कि इनकी सेहत भी बनेगी। जिससे ये जुर्म छोड़कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होंगे।
कैदी चरनजीत को देख आया आइडिया
प्रोजेक्ट का आइडिया कत्ल केस में जेल में बंद चरनजीत कुमार से मिला। चरनजीत कभी-कभी मेज पर हाथों से ही ढोलक बजाने लगता था। जेल अधिकारियों ने नोट किया कि ढोलक बजाने के बाद वह तनाव मुक्त हो जाता था। बस! यहीं से हुई इस प्रोजेक्ट की शुरुआत। अधिकारियों ने बाहर से एक ट्रेनर का इंतजाम कर उसे ढोल बजाना सिखाया। चरनजीत रोज सुबह जेल की हर बैरक में जाता है और 15 मिनट तक ढोल बजाकर कैदियों को नाचने पर मजबूर कर देता है।
आने वाले दिनों में पंजाब की सभी 28 जेलों में बंद कैदियों की टीमें बनाकर पंजाब इंटर जेल टूर्नामेंट करवाया जाएगा। देश की लगभग सभी जेलों के डीजीपी से ऑल इंडिया जेल स्पोर्ट्स मीट करवाने का भी आग्रह किया है। बढ़िया खेलने वालों को सरकार से इजाजत लेकर राष्ट्रीय स्तर के खेल मुकाबलों में हिस्सा दिलवाया जाएगा।
अनिल कौशिक, डीजीपी जेल