पंजाब की राजनीति में दखल न दें डेरा मुखी, नूर खालसा फौज होगी सरगर्म
Source: भास्कर न्यूज | Last Updated 03:41(06/02/12)
बठिंडा. पंजाब की राजनीति डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रभाव में है, जिससे सिखों के वोट बैंक को नजरअंदाज कर राजनीतिक दल डेरावाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इसलिए पंथक मर्यादा को कायम रखते हुए अब ‘एक नूर खालसा फौज’ पंजाब से डेरे का प्रभाव खत्म करने को सरगर्म होगी। इसके लिए जत्थेबंदी का विस्तार किया जाएगा व नए दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
यह बातें पांचवें तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ ने बठिंडा के गुरुद्वारा श्री हाजीरतन साहिब में पत्रकारवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि डेरा सच्चा सौदा मुखी ने धर्म के बाद अब पंजाब की राजनीति में भी छेड़छाड़ शुरू कर दी है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि डेरा राजनीतिक दलों से अपनी साठ-गांठ खुलकर जाहिर करे, फिर सिख जत्थेबंदियां अपनी ताकत दिखाएंगी। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल डेरे को समर्थन देगा, सिख जत्थेबंदियां उसके उलट चलेंगी। उधर, जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ के इस बयान से पुलिस व खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
विरोध के तीखे स्वर
डेरा सच्चा सौदा मुखी ने धर्म के बाद अब पंजाब की राजनीति में भी छेड़छाड़ शुरू कर दी है : नंदगढ़
डेरा राजनीतिक दलों से अपनी साठ-गांठ खुलकर जाहिर करे, फिर सिख जत्थेबंदियां अपनी ताकत दिखाएंगी।
डेरे से संबंध रखने वाले नेता को नहीं मिलेगा सिरोपा
जत्थेदार नंदगढ़ ने कहा कि डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह ने डेरा सलाबतपुरा में जो स्वांग रचकर सिखों की भावनाओं को आहत किया था उसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब से 17 मई, 2011 को हुकमनामा जारी कर डेरा मुखी व उससे संबंध रखने वाले लोगों को पंथ से निष्कासित कर दिया था।
उसी हुकमनामे के तहत डेरे से संबंध रखने वाले या उससे वोट मांगने जाने वाले किसी भी राजनीतिज्ञ के खिलाफ सबूत मिलने पर उसे तख्त साहिब पर सिरोपा नहीं दिया जाएगा, फिर चाहे वह बादल ही क्यों न हो। जत्थेदार नंदगढ़ ने शिअद की तरफ से केस व दाढ़ी कत्ल करने वाले व्यक्तियों को सर्कल जत्थेदार की उपाधि देने का भी कड़ा नोटिस लिया। उन्होंने कहा कि शिअद कम से कम जत्थेदार शब्द की पंथक मर्यादा को तो ध्यान में रखकर कार्यकर्ताओं को उपाधि दे।
चुनाव आयोग के दायरे में आए डेरा
बलवंत सिंह नंदगढ़ ने कहा कि चुनाव आयोग ने मंदिर गुरुद्वारों में राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाते हुए इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया, मगर डेरा सच्चा सौदा सिरसा में खुलेआम राजनीतिक दलों से साठ-गांठ कर उन्हें समर्थन देकर राजनीति में हस्तक्षेप कर रहा है, मगर इस पर चुनाव आयोग ने आंखें मूंद रखी हैं। चुनाव आयोग को चाहिए कि डेरे को भी अपने दायरे में ले। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में डेरे की वोट के पाने के लिए पार्टियों द्वारा किया गया प्रयास शर्मनाक है।