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जानिए... किसे चाहिए विदेशी किराना स्टोर

भास्कर न्यूज | Dec 10, 2012, 07:24AM IST
जानिए... किसे चाहिए विदेशी किराना स्टोर
शनिवार को पीएयू आए पीएम मनमोहन सिंह ने सीएम प्रकाश सिंह बादल को नसीहत दी कि उन्हें राज्य में रिटेल सेक्टर में एफडीआई की इजाजत देनी चाहिए।
 
अगर ऐसा होता है तो लुधियाना में भी रिटेल स्टोर खुलेंगे। क्या सोचता है शहर इस बारे में:
 
इससे फायदा ही होगा
 
डॉ. दिनेश मलिक
प्रोफेसर (इकॉनामिक्स), कमला लोहटिया कॉलेज 
 
 
एफडीआई के इस फैसले के बाद विदेशी कंपनियां देश में अपना स्ट्रक्चर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इनवेस्टमेंट करेंगी। इससे विदेशी मुद्रा आएगी, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। सरकार ने अगर इस मुद्दे पर स्टैंड लिया है, तो उसके पीछे इकनॉमिक रिसर्च है। छोटे कारोबारी प्रभावित न हों, इसीलिए इस फैसले पर पॉपुलेशन कैप लगाया गया है। इस फैसले से देश के 53 शहरों में विदेशी कंपनियों के रिटेल स्टोर खुलने का रास्ता साफ हो गया है। अब जरूरत फाउल प्ले चिल्लाने के बजाय कंपटीशन के लिए तैयार होने की है। अगर यहां के कारोबारियों को लगता है कि वे अच्छी क्वॉलिटी का सामान बेहतर दाम पर मुहैया करा रहे हैं, तो उन्हें कामयाबी भी मिलेगी। इस फैसले से कारोबार में पारदर्शिता आएगी। किसानों को बेहतर दाम मिलेगा और नौजवानों को रोजगार। 
 
उपभोक्ता के लिए ठीक
 
डॉ. आरती नैय्यर 
असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स), गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज
 
देश में रिटेल में एफडीआई लागू होने से सभी का विकास होगा। इस फैसले से जीडीपी को भी मजबूती मिलेगी। किराना सेक्टर की बात करें, तो कंस्यूमर को सस्ता सामान मिलेगा। अहम मसला इस फैसले से होने वाले फायदे का है। मेरा मानना है कि इस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए कि उत्पादक किसानों को बेहतर दाम मिले और कंस्यूमर्स को सस्ते में सामान। सरकार को इस तरह के चेक प्वाइंट्स बनाने होंगे, जिसमें यह देखा जा सके कि बाहर की कंपनियां मुनाफे को यहीं पर पूंजी की तरह इस्तेमाल करें, न कि इसे देश के बाहर ले जाएं। यह भी सख्ती से सुनिश्चित करना होगा कि जिन शर्तो पर इन्हें इन्वेस्टमेंट की अनुमति दी गई है, उनका कड़ाई से पालन किया जाए। ऐसा होने पर वायदे के मुताबिक भरपूर रोजगार भी मिलेगा। इस फैसले की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से नहीं करनी चाहिए। 
 
ब्रांडेड के लिए मॉल
 
मॉल में हम ब्रांडेड सामान खरीदने के लिए जाते हैं। कई बार तो बच्चों को घुमाने के लिए जाना पड़ता है। बड़े आउटलेट्स या स्टोर्स पर जाने का ये फायदा रहता है कि एक ही छत के नीचे सारा सामान मिल जाता है। मगर ऐसा नहीं कि इसके चलते गली के नुक्कड़ वाले करियाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वैसे भी बड़े आउटलेट और छोटे दुकानदारों के रेट में ज्यादा फर्क नहीं है। बस बड़े स्टोर स्कीम के जरिए लोगों को फुसलाते हैं। 
 
रीटा बेदी
पत्नी पूर्व भाजपा विधायक हरीश बेदी  
 
करियाना ही सुहाए
 
चाहे कितने भी स्टोर खुल जाएं, गली के करियाने वाले का कोई मुकाबला नहीं है। जब भी जरूरत होती है, फोन करके सामान मंगवाया जा सकता है। और ऐसा नहीं कि उसके रेट बहुत ज्यादा होते हैं। शहर में बड़े स्टोर खुलें, ये अच्छा है, मगर इसका असर छोटे दुकानदारों पर नहीं पड़ना चाहिए। लोअर मिडल क्लास और उससे नीचे के तबके के लोग बड़े स्टोर्स में खरीदारी के लिए नहीं जाते हैं। फर्क सिर्फ पैकिंग का है। 
 
 
वीना गोसाईं
पत्नी पूर्व डिप्टी स्पीकर सतपाल गोसाईं   
 
  
लोकल है बेस्ट
 
हम बड़े स्टोर्स में शॉपिंग करने के लिए नहीं, हां कभी कभार घूमने के लिए चले जाते हैं। करियाने की खरीदारी के लिए लोकल दुकानों में जाते हैं और बाकी सामान के लिए घुमार मंडी, माल रोड की दुकानों में। मुझे लगता है कि केन्द्र सरकार एफडीआई को लागू कर पूंजीवादी अमेरिकन नीति को बढ़ावा दे रही है। अगर वह चाहे तो ऐसी नीतियां बनाए जिससे अपने ही रिटेलर अच्छी गुणवत्ता वाला सामान बेहतर दामों पर दें। 
 
विजयराय ढांडा
पत्नी पूर्व विधायक हरीश राय ढांडा अकाली दल 
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