नक्शे से मिट जाएगा 60 साल पुराना गांव

मत्तेवाड़ा (लुधियाना). मत्तेवाड़ा मेन रोड से जंगल पार कर खुले मैदान और दरिया के बीच एक छोटा सा गांव है सेखेवाल। ऊबड़-खाबड़ खेत की पगडंडियां इस गांव को जाती हैं। छोटे-छोटे करीब 62 घर हैं। 2000 लोग रहते हैं। मत्तेवाड़ा की किस्मत संवारने के लिए सेखेवाल की कुर्बानी होगी।
देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से लोग इसी गांव में आकर बसेरा बनाए थे। लेकिन अब उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के ड्रीम प्रोजेक्ट की जद में है। 1400 एकड़ जमीन का केंद्र सेखेवाल अब लुधियाना के नक्शे से मिट जाएगा, क्योंकि यहां अब देश का सबसे बड़ा कैसीनो खुलने जा रहा है। खेत की पगडंडियों के सहारे हम सेखेवाल पहुंचे। सरपंच के घर का रास्ता पूछा, टूटे-फूटे मिट्टी और ईंट से बना घर सरपंच का था। जब हमने कहा कि सरपंच से मिलना है तो एक 26 साल की युवती बोली वो ही सरपंच है। यह युवती तीन साल से जमीन की जंग लड़ रही है।
सेखेवाल वही पिंड है जो उप मुख्यमंत्री बादल के ड्रीम प्रोजेक्ट कैसीनो व गोल्फ कोर्स की जमीन का केंद्र है। बगैर इस गांव के लोगों को हटाए 1400 एकड़ में न तो कैसीनो खुल सकता है। न ही हार्स रेस कोर्स टर्फ या फिर गोल्फ कोर्स व फाइव स्टार होटल। सेखेवाल के लोग आसपास की जमीन को खेती के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।
नक्शे से..
हमें बताया गया कि पटवारी आए हैं। जमीन का माप-जोख कर रहे हैं। हम गांव से बाहर आए तो पटवारी चले गए। सेखेवाल के रंजीत, जागीर कौर, लेख सिंह, महिंदर सिंह, मोहन सिंह कहते हैं कि गांव खाली कर देंगे। लेकिन सरकार पहले उन्हें जमीन मुहैया कराए।
यहीं सतलुज दरिया से पहले लाहौरिया का डेरा है। पाकिस्तान से विस्थापित होकर इन लोगों ने सतलुज दरिया का किनारा चुना था। लगभग 60 साल से इनका डेरा यहीं है। इन्हें भी जमीन खाली करनी पड़ेगी। इन लोगों को यह नहीं पता है कि यहां कैसीनो भी खुलेगा।
घर और जमीन दो
सरपंच कुलदीप कौर कहती हैं कि सरकार फुसलाने में लगी है। पटवारी कहते हैं कि जमीन खाली कर दो। मेन रोड पर घर और खेती लायक जमीन देंगे। लेकिन सब झूठ है। हम गांव खाली कर देंगे। लेकिन हमें पहले घर और खेती की जमीन दी जाए। वह भी लिखित रूप में।






