बीते जमाने की बात हो जाएगी 303
Source: कुलवंत सिंह | Last Updated 05:31(10/02/12)
पटियाला. अंग्रेजों के समय में शान रही 303 बंदूक अब पंजाब पुलिस में बीते जमाने की बात हो जाएगी। डेढ़ सौ साल ब्रिटिश और भारतीय पुलिस के हाथों खेलने वाले इस हथियार को पंजाब पुलिस ने नकार दिया है।
यही नहीं पुलिस में भर्ती होने वाले रंगरूटों को दी जाने वाली ट्रेनिंग से भी इसे बाहर कर दिया गया। अब इस बन्दूक को राज्य के सभी थानों से वापस लेकर नष्ट किया जा रहा है। चार किलो वजनी इस हथियार की जगह एसएलआर (सेल्फ लोडिड राइफल) और एएलआर (ऑटो लोडिड राइफल) ने ले ली है।
नई तकनीक ने पछाड़ा
पटियाला जोन के आईजी शाम लाल गक्खड़ ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने को पहले ये हथियार कारगर था, क्योंकि जब यह चलती है तो एक धमाका होता है, जिससे डर पैदा होता है। अब अपराधियों के पास भी नई तकनीक के हथियार आ गए हैं तो उनका मुकाबला करने को इसे वापस लेने का फैसला किया है। कुछेक को छोड़ सभी जगहों से इसे मंगवा लिया गया है। अब इसे नष्ट किया जा रहा है।
अब एसएलआर, एएलआर
खन्ना के एसएसपी मंदीप सिद्धू ने बताया कि इस बंदूक को वापस मंगवाने की प्रक्रिया 2007 से शुरू कर दी थी। इसकी जगह एसएलआर (सेल्फ लोडिड राइफल) और एएलआर (ऑटो लोडिड राइफल) ने ले ली है। इस में सिर्फ एक कमी है कि इससे एक बार में एक ही फायर किया जा सकता है। ट्रेनिंग से भी इसे बाहर कर दिया गया। जवान खुश हैं कि अब उनको चार किलो वजनी बन्दूक का भार नहीं ढोना पड़ेगा।
थ्री नॉट थ्री का इतिहास
भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान ब्रिटिश सेना के पास यही बंदूक होती थी। इसी बंदूक ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने वाले भारतीयों का खून पिया था। आजादी संग्राम को नई दिशा देने वाले शहीद मंगल पांडेय ने इसी हथियार से अंग्रेज कमांडर को गोली मारी थी। जलियांवाला बाग कांड और जालंधर में अकाली बब्बरों के विरुद्ध यही बंदूक बोली थी।
मुकाबले में फुस्स
आजादी के बाद भारी भरकम इस बंदूक का वजन और आकार कम किया गया लेकिन 80 और 90 के दशक में पंजाब में जब आतंकवाद का दौर आया तो ये हथियार बौना साबित हुआ। आतंकवादियों के पास स्टेनगन, एके 47, 56 और माउजर जैसे आधुनिक हथियारों का मुकाबला यह नहीं कर पाई। कारण यह था कि इस बन्दूक से एक समय में सिर्फ एक ही गोली चलायी जा सकती है और आतंकी उतने ही समय में कई राउंड फायरिंग कर देते थे। उसके बाद से पंजाब पुलिस के जवानों को आधुनिक हथियार दिए गए।