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अजब-गजब: इन्हें तो 12.12.12 को ही बेबी चाहिए

विपन जंड | Dec 11, 2012, 05:55AM IST
अजब-गजब: इन्हें तो 12.12.12 को ही बेबी चाहिए
लुधियाना। इकबाल नर्सिग होम के डॉक्टर इकबाल आहुजा के पास बीते दिनों एक पेशेंट के पति ने खास रिक्वेस्ट की। सिविल लाइंस के रहने वाले यह बिजनेसमैन जल्द ही पिता बनने वाले हैं और उनकी पत्नी का इलाज इस नर्सिग होम में चल रहा है। इस कपल का पहला बेबी सिजेरियन से हुआ था।कुछ मेडिकल कांप्लीकेशन की वजह से दूसरा बच्चा भी सिजेरियन होना तय है।
 
डिलीवरी की ड्यू डेट 14 दिसंबर की रखी गई है। मगर यह कपल चाहता है कि डॉक्टर 12 दिसंबर को ही ऑपरेशन कर बेबी डिलीवर करवा दें।
 
डॉ. आहुजा ने उनकी रिक्वेस्ट मान ली है और अब कपल 12.12.12 की इस सदी की आखिरी मैजिकल डेट पर पैदा होने वाले बेबी की तैयारियों में नए उत्साह के साथ जुट गया है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। इंटरनेट पर हाइप और न्यूमरोलॉजी के लॉजिक पर सवार ट्रिपल ट्वेल्व का फीवर शहर में सिर चढ़कर बोल रहा है। 
 
बुकिंग भी चल रही है
 
कई डॉक्टरों के पास खास तारीख की बुकिंग भी हो गई है। ओसवाल हॉस्पिटल की डॉ. तजिंदर कौर के पास लुधियाना के तीन मरीज हैं, जिन्होंने 12 दिसंबर के खास दिन पर बच्चे के जन्म की इच्छा जताई। डॉक्टर कौर का कहना है कि इनका प्रेग्नेंसी पीरियड पूरा हो चुका है। इसलिए यह डेट दे दी गई है। 
 
तीन हफ्ते पहले ही पहुंचे डिलीवरी कराने 
 
गर्भावस्था का पीरियड पूरा होने के बाद आमतौर पर आर्टिफिशियल  दर्द लगवाकर डिलीवरी करानी पड़ती ही है। इसलिए ऐसे केसों में मरीज की मांग पूरी करने तक तो ठीक है, पर लोगों में इस मैजिकल डेट को लेकर इतना फीवर है कि गुरु तेग बहादुर चेरिटेबल हॉस्पिटल की डॉ. विनीता मुंजाल के पास 40 वीक का प्रेग्नेंसी पीरियड पूरा होने से पहले ही 12 दिसंबर को दर्द लगवाकर डिलीवरी के लिए संपर्क किया। डॉ.मुंजाल के मुताबिक दोनों महिलाओं की प्रेग्नेंसी 37 वीक की थी। ऐसे में उन्हें समझाया गया कि सिर्फ एक खास डेट के लिए प्री मेच्योर डिलीवरी नहीं करानी चाहिए।
 
12 दिसंबर को 3.20 के बाद गंड मूल
 
वैसे 12 दिसंबर को दोपहर 3.20 के बाद गंड मूल भी है। मान्यता के मुताबिक गंड मूल में बच्चे के जन्म को पिता के लिए भारी माना जाता है। पंडित ओपी त्रिपाठी के मुताबिक गंड मूल का दोष निवारण हो जाता है, लेकिन आर्टीफिशियल डिलीवरी को वह ठीक नहीं मानते। उनके मुताबिक इससे शिशु की कुंडली गड़बड़ा जाती है। पंडित त्रिपाठी के मुताबिक भगवान और प्रकृति के तय समय से पहले बच्चे के जन्म पर सही कुंडली नहीं बनती।
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