शुक्रिया पंजाबः नतीजा छह को पर आप तो जीत गए
Source: कमलेश सिंह | Last Updated 02:44(02/02/12)
सबसे पहले मुबारकबाद। पंजाब ने पूरे देश को दिखा दिया कि यूं निभाई जाती है जिम्मेदारी। लोकतंत्र में हर नागरिक की जि़म्मेदारी होती है कि वह इस प्रक्रिया में भाग ले। पंजाब के 78 फ़ीसदी से ज्यादा वोटरों ने अपनी अंगुली पर तिलक लगाकर लोकतंत्र के इस पर्व में जैसी श्रद्धा दिखाई, उसने देश को नई दिशा दी है।
लोकतंत्र के प्रति उदासीनता का लगातार बढ़ना और यह मान लेना कि सिस्टम ही खराब है, देश के लिए और लोकतंत्र के लिए खतरा जैसा बन रहा था। जनतंत्र में जन भागीदारी का एक उदाहरण पेश करने का मौका था और पंजाब उसमें खरा उतरा है। दैनिक भास्कर ने अंगुली पर तिलक का अभियान छेड़ आपसे यह आग्रह किया था कि हमें पिछला रिकॉर्ड तोड़ना है। आपने हमारी बात भी रख ली, इसलिए आपका धन्यवाद।
आज जबकि चुनाव के नतीजे महीने भर दूर हैं, हर आदमी के दिमाग में ये सवाल है कौन जीत रहा है, किसकी सरकार बनेगी? कांग्रेस, अकाली-बीजेपी और सांझा मोर्चा, तीनों अगली सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं पर सच तो ये है कि सच किसी को मालूम नहीं। यही फर्क होता है जब मुद्दों पर चुनाव होते हैं। इस बार एक अखबार के तौर पर हमारी कोशिश रही कि हम चुनाव के दौरान राजनीतिक लहर और खोखली भाषणबाज़ी को सीधे नकार दें। बात मुद्दों पर लाएं। हमने पूरे एक महीने पंजाब के मुद्दों को आपके सामने रखा। फिर हलका-दर-हलका वहां की राजनीतिक तस्वीर पेश की, पर ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।
हमें जो सच दिखा, आपके सामने रख दिया। आपने फैसला दे दिया है, वह 6 मार्च को सबके सामने होगा। जो भी होगा, सबको सिर-माथे से लगाना होगा। अब तक कोई राजनीतिक पंडित जीत-हार की भविष्यवाणी नहीं कर पाया, इस से स्पष्ट है कि आपने भी लहर और भाषणबाज़ी को नकारा और अपने इरादे को एक बटन से वोटिंग मशीन में सुरक्षित कर दिया। आपकी भागेदारी के बिना ‘सही को चुनो’ अभियान संभव ही नहीं था। आपका बहुत शुक्रिया। चुनाव प्रचार के महीने में कई विज्ञापन ख़बरों की तरह पेश किए जाते रहे हैं।
चूंकि उसमें विज्ञापन लिखा नहीं होता, इस से पाठक को धोखा हो सकता है। हालांकि विज्ञापन ही एक अखबार के लिए आय का ज़रिया होता है पर हमने ऐसे सभी विज्ञापनों को सीधे-सीधे नहीं कह दिया। हमने एक शर्त रखी कि अगर विज्ञापन थोड़ा भी खबर की तरह आया तो हम उस के ऊपर स्पष्ट, बड़ी साइज़ में विज्ञापन लिखेंगे। इस कारण दैनिक भास्कर में जो भी विज्ञापन आए, विज्ञापन की शक्ल में ही आए। जो इक्का-दुक्का खबर की शक्ल में दिखे, उनके ऊपर हमने विज्ञापन लिख दिया तो वो ऐसे बिदके कि दुबारा नहीं आए। इस कारण आपको चुनाव के दौरान इस अखबार में एक ही पन्ने पर एक ही हलके के तीन-तीन उम्मीदवारों के ‘फलां के पक्ष में लहर’ और ‘फलां को मिल रहा अपार जनसमर्थन’ जैसे लेख पढ़ने को नहीं मिले।
हमने कुछ करोड़ रुपयों के लिए सिद्धांतों से समझौता इसलिए नहीं किया क्योंकि पाठक के भरोसे की कीमत रुपयों में नहीं लगाई जा सकती। हमने निष्पक्षता का वादा किया था। हम उन उम्मीदवारों और राजनीतिक पार्टियों का भी धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने हम पर मनमर्जी खबरें छापने का दबाव नहीं बनाया और हमारे सिद्धांतों पर भरोसा किया। जिन्होंने विज्ञापन दिया, उन्होंने भी हमारे सामने कोई पक्ष लेने की शर्त नहीं रखी, इसके लिए हम उनको धन्यवाद कहते हैं। हमारा ‘नो-पेड न्यूज़’ का अभियान चुनाव के साथ बंद नहीं हुआ है। हम एक बार फिर दुहरा दें कि दैनिक भास्कर में पैसे लेकर खबरें नहीं छापी जातीं। अगर खबर है तो उसका खबर होना ही काफी है। अगर कोई पैसे लेकर दैनिक भास्कर में खबरें छपवाने का दावा करता हो तो हमें इस पते पर इमेल करें- nopaidnews@bhaskarnet.com